पीएमसीएच में मीडिया की नो इंट्री, अस्पताल प्रशासन ने लगायी रोक, जगह-जगह लगाए गए पोस्टर

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : मीडिया ने अस्पतालों का सच का क्या दिखाया पीएमसीएच प्रशासन ने हॉस्पीटल परिसर में प्रवेश पर ही रोक लगाने का फरमान जारी कर दिया. अस्पताल प्रशासन की ओर से इसके लिए परिसर में जगह-जगह पोस्टर चस्पा दिए गए हैं. जिसमें साफ-साफ लिखा ” पीएमसीएच के वार्ड,आउटडोर, इंडोर, आकस्मिकी, ओटी, आईसीयू एवं अन्य संवेदनशील स्थानों में कहीं भी बिना अनुमति के फोटो या वीडियो खिंचना और बनाना सख्त मना है”.

अस्पताल प्रशासन के इस फरमान से यह जाहिर होता है कि जूनियर डॉक्टरों की लड़ाई के बीच अब मीडिया को भी PMCH प्रशासन निशाने पर ले रहा है. मीडिया को बीच मे लाकर इस लड़ाई को डायवर्ट किया जा रहा है. अस्पताल में अब संबंधित विभागों के अध्यक्ष से पूछे बिना फोटो या वीडियोग्राफी नहीं हो सकेगी. दर्जनों जगहों पर फोटो एवं वीडियो लेने पर रोक लगा दी गई है. हालांकि पीएमसीएच प्रशासन इसे कोरोना के कारण उठाया गया कदम बता रहा है.



उधर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है. हड़ताल का आज 6ठां दिन है. हड़ताली डॉक्टर अपनी जिद पर अड़े हुए हैं. इधर सरकार ने भी नो वर्क नो पे के तौर पर स्टाइपेंड में कौटती करने, और हॉस्टल खाली करने का आदेश तक दे दिया है. इतने के बाद भी जूनियर डॉक्टर काम पर लौटने को तैयार नहीं हुए है.

जूनियर डॉक्टरों ने लाइव सिटीज को  बताया कि जबतक उनकी मांग पूरी नहीं होगी तबतक वो सभी काम पर नहीं लौटेंगे. उनका कहना है कि चाहे जो मजबूरी हो उनकी मांगें पूरी हो. प्रत्येक तीन साल पर स्टाइपेंड रिवीजन करने का सहमति बनी थी. लेकिन आजतक उसका रिवीजन नहीं किया गया. जब भी इस मुद्दे को लेकर सरकार से वार्ता करने की कोशिश की गयी तब-तब कुछ ना कुछ बहाने बनाकर मुद्दे को टाल दिया जाता है. हड़ताली डॉक्टरों ने बताया कि पिछले 6 दिनों से हमलोग अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन अभीतक सरकार की ओर से किसी प्रकार की पहल नहीं की गयी.

इधर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए सरकार और कड़ा रूख अख्तियार करने का मन बना लिया है. स्वास्थ्य विभाग जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी करने में जुट गया है. साथ ही सभी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के अधीक्षक और प्राचार्य को नए सिरे से हड़ताली डॉक्टरों को चिन्हित करते हुए उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है.

बताया जा रहा है कि सरकार जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर कोर्ट में अवमानना का मामला दायर कर सकती है. इसी वर्ष अगस्त में कोर्ट ने डॉक्टरों की प्रस्तावित हड़ताल पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि राज्य कोरोना महामारी से जूझ रहा है, ऐसी स्थिति में डॉक्टरों की हड़ताल उचित नहीं है.