पटना में कहीं नहीं मिल रहा अखबार, लगे जिंदाबाद के जोरदार नारे

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : राजधानी पटना के लोगों की मॉर्निंग आज 30 जनवरी 2018 को बगैर अखबारों की है . कहीं किसी को अखबार नहीं मिला है . ऐसे में, वे लोग अधिक परेशान हुए हैं, जिन्हें नींद खुलते ही अखबार की जरुरत होती है . अखबार कल 31 जनवरी को भी मॉर्निंग में मिलेगा कि नहीं, अभी गारंटी नहीं है . पटना सिटी इलाके में रहने वाले लोगों को अखबार पिछले कई दिनों से नहीं मिल रहे थे . अचानक पैदा हुए इस संकट से पटना के रीडर्स ही नहीं सभी अखबारों के मैनेजमेंट के सामने भी संकट पैदा हो गया है . अखबार बांटने वाले हॉकर्स जिंदाबाद के जोरदार नारे लगा रहे हैं .

प्रमुख अख़बार…

दरअसल, पटना में अखबार बांटने वाले हॉकर्स ने आज सुबह-सुबह हड़ताल कर दी . पटना सिटी में यह हड़ताल कई दिनों से चल रही है . हॉकर्स अपना कमीशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं . पिछले कई सालों से पटना के हॉकर्स को अखबार की कीमत का 30 प्रतिशत कमीशन मिलता रहा है . अब इसे बढ़ाने की मांग हो रही है . अखबार प्रबंधन अभी मानने को तैयार नहीं है . क्या आप जानते हैं अखबार के पन्नों पर ये रंग बिरंगे डॉट्स क्यों होते हैं? ये रंग बहुत काम के हैं 

पटना में हॉकर्स के कई यूनियन हैं . पर इस दफे यूनियन का भी जोर चलता नहीं दिख रहा है . सीधे हॉकर्स किसी नेता की बात सुनने-मानने के बजाय एकजुट हो गए हैं . इस कारण अखबारों के समूह और भी परेशान हैं . अचानक हुई हड़ताल से आज सुबह ऐसे लोग जरुर बढ़ गए, जो खबरों की भूख मिटाने को डिजिटल प्लेटफार्म पर गए . बिहार के सबसे बड़े न्यूज़ पोर्टल livecities.in  ने भी नोटिस किया कि आज ट्यूजडे मॉर्निंग को बड़ी संख्या में नए रीडर्स पटना से जुड़े हुए हैं .

अखबार समूहों की परेशानी यह है कि वे अपने एडवरटाइजर को क्या बताएँगे . जब अखबार स्ट्राइक के कारण रीडर्स के पास पहुंचे ही नहीं, तो विज्ञापन का इम्पैक्ट कैसा . पटना के अखबार प्रेमी कई कारणों से आज सुबह अखबार के इंतजार में थे . मंडे 29 जनवरी को पटना में मासूम बच्चे का अपहरण हुआ था . लेकिन एसएसपी मनु महाराज ने खुद नौ घंटों के भीतर बच्चे को सोनपुर से बरामद किया . फिर नियोजित शिक्षक सोमवार को समान वेतन पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई को विस्तार से जानना चाहते थे . भाजपा नितिन गडकरी के पटना कार्यक्रम का कवरेज देखना चाहती थी . और भी कई बड़े समाचार थे, लेकिन आज पटना में कहीं भी अखबार पहुंचा ही नहीं .