अब निजी बैंक व कर्मी भी सीवीसी के दायरे में, किया भ्रष्टाचार तो होगी जांच

लाइव सिटीज डेस्क :  अब तक सार्वजानिक क्षेत्रों के बैंक व उसके कर्मचारियों पर केंद्रीय सतर्कता आयोग की पैनी नजर बनी होती थी. यदि कोई भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी का मामला सामने आता है तो ये जांच कर उचित कार्रवाई करते हैं. लेकिन अब सीवीसी का दायरा बढ़ चुका है. अब इसके रडार में निजी बैंक व इसके कर्मचारी  भी आ गए हैं.  

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) अब निजी क्षेत्र के बैंकों और उनके कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकता है. सतर्कता आयुक्त टीएम भसीन ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक और वित्तीय सेवा विभाग ने हाल ने इस बारे में सीवीसी को आवश्यक मंजूरी दे दी है.

भसीन ने बताया कि सीवीसी अब निजी क्षेत्र के बैंकों और उनके प्रबंधन मसलन सीएमडी या एमडी से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों की भी जांच कर सकता है. रिजर्व बैंक और  इस बारे में प्रावधानों को मंजूरी दी है. भसीन ने कहा, इस बारे में आवश्यक तंत्र स्थापित किया गया है. निजी क्षेत्र के बैंकों में भ्रष्टाचार के मामलों की अब सीवीसी जांच कर सकेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल कहा था कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून, 1988 के तहत किसी मामले में निजी क्षेत्र के बैंकों के चेयरमैन, प्रबंध निदेशकों और अन्य अधिकारियों को भी लोकसेवक के रूप में देखा जाना चाहिए. रिजर्व बैंक के लाइसेंस के तहत बैंकों में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को भ्रष्टाचार रोधक कानून के तहत लोक सेवक माना जाएगा. कोर्ट ने कहा था कि निजी या सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी आम जनता के लिए सेवाएं देते हैं इसलिए वे इस कानून के तहत आते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बैंकिंग नियमन कानून की धारा 46ए का भी हवाला देते हुए कहा था कि इस तरह के बैंक अधिकारियों को सरकारी अधिकारी माना जाए.
बता दें कि सीवीसी एक सांविधिक निकाय है. यह केंद्र सरकार के विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों बैंक, बीमा कंपनियों और उनके कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी आदि के मामलों की जांच करता है.

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