चौबे जी ! ‘बकचोदी’ ने ले ली है AIIMS पटना में रौशन की जान,आपको रोना आया क्‍या ?

पटना : बक्‍सर के सांसद अश्विनी कुमार चौबे केन्‍द्र में मंत्री बने . बहुत दिन नहीं हुए हैं . सौभाग्‍य–दुर्भाग्‍य राज्‍य मंत्री की हैसियत में स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय मिला . मंत्री बनते शुरु हो गए . बातों की खेती शुरु हुई . आगे बिहार वाले निशाने पर आ गये . सुविधा क्‍या देते,सीधे बिहार वालों को धमका ही दिया . कहा-एम्‍स,नई दिल्‍ली में बिहारी फालतू की भीड़ लगाये रखते हैं . सर्दी-खांसी में भी पहुंच जाते हैं . इतने भर से नहीं रुके थे अश्विनी चौबे . आगे बोल गये-एम्‍स के डायरेक्‍टर को बोल रहा हूं कि भीड़ लगाने वाले बिहारियों को बिना इलाज वापस कर दें .

मंत्री की बकैती,जिसे सोशल मीडिया के यूजर्स ने नेताओं की बकचोदी भी कहा,पर बिहार उबल पड़ा . फिर चौबे करेक्‍शन के प्रोसेस में एम्‍स,पटना की बात करने लगे . असली जवाब एम्‍स,नई दिल्‍ली के डाक्‍टरों ने दिया . कहा – आप मंत्री जरुर हैं चौबे जी,लेकिन हम एम्‍स के डाक्‍टर भरोसे के साथ इलाज को आये किसी भी मरीज को नहीं लौटायेंगे .

बेटी के शव को कंधे पर ले जाते मजदूर दंपति

अब मंगलवार 17 अक्‍तूबर की असली कहानी को जानिए . अश्विनी चौबे नेता हैं-मंत्री हैं, वे भले न पसीजें,पर आप जरुर रो जायेंगे . चौबे ने एम्‍स,पटना की बात की थी . कहा था-बिहार के मरीज एम्‍स,नई दिल्‍ली न जाकर एम्‍स,पटना जाएं . हां,पटना के उसी एम्‍स में, जिसे बनने-खुलने में साढ़े तेरह साल लग गये हैं, पर आज तक इमरजेंसी फैसिलिटी नहीं शुरु हुई है . एम्‍स बिना इमरजेंसी का, कितने गौरव की बात है,नेता प्रजाति के लोग ही बता सकते हैं .

नेता आगे भी शान से बातें करते रहेंगे,लेकिन लखीसराय के कजरा के मजदूर रामबालक की मासूम बेटी रौशन को बिना इलाज एम्‍स,पटना ने मार डाला, इसकी बात कोई नहीं करेगा . रामबालक की बेटी रौशन ने एम्‍स,पटना में मंगलवार को पिता के कंधे पर अंतिम सांस लेकर बिहार के हेल्‍थ सिस्‍टम को कितने लाख तमाचे मारे हैं, इसकी गूंज सिर्फ आम लोग ही सुन सकते हैं,वीआईपी/वीवीआईपी जिंदगी जीने वाले कभी नहीं समझ सकेंगे .

रामबालक गरीब है,मजदूर है . पैसे इतने नहीं थे कि वह बीमार बेटी रौशन को निजी अस्‍पतालों में इलाज करने वाले बड़े डाक्‍टरों के पास ले जाता . एम्‍स,नई दिल्‍ली चले जाने को भी पैसे नहीं थे . ऐसे में,शायद किसी ने बीमार बेटी को एम्‍स,पटना ले जाने की सलाह दे दी थी . पर रामबालक को क्‍या पता था कि एम्‍स,पटना में डाक्‍टर घड़ी का घंटा देख रौशन को देखेंगे भी नहीं और वह सिसकियां लेती मौत को प्राप्‍त हो जाएगी .

दरअसल,मासूम रौशन को पिछले कई दिनों से बुखार आ रहा था और वह बार-बार बेहोश हो जा रही थी . लोकल डाक्‍टरों ने फीस ऐंठने के अलावा कोई रोग नहीं पकड़ा था . अंधेरे में दवा चलाए जा रहे थे,जैसा बिहार के सभी छोटे-मंझले शहरों में होता है . अंत में,बेटी को बचा लेने की उम्‍मीद पाले रामबालक मंगलवार को एम्‍स,पटना पहुंचा .

एम्‍स,पटना पहुंचने के बाद रामबालक को पता चला कि यहां कोई इमरजेंसी की सुविधा नहीं है . परेशान रामबालक ओपीडी में बेटी को दिखाने के लिए रजिस्‍ट्रेशन काउंटर की लाइन में लग गया . बेटी रौशन मां की गोद तड़प रही थी . रजिस्‍ट्रेशन की लाइन बहुत लंबी थी . बेटी की बिगड़ती हालत को देख रामबालक ने लाइन में आगे बढ़ने की कोशिश की,तो न सिर्फ काउंटर के भीतर से बल्कि आगे वालों ने भी ड़ाट पिला दी . बेचारा रामबालक बेटी रौशन की बिगड़ती स्थिति की दुहाई सबों को देता रहा,पर कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ .

अब जब रामबालक की बारी आई तो रजिस्‍ट्रेशन काउंटर की खिड़की बंद हो गई . कहा गया कि बीमार को देखने का घंटा खत्‍म हो गया है . अब आज नहीं कल देखा जाएगा . रामबालक रोता रहा,बेटी की ओर इशारा कर इलाज की भीख मांगता रहा,पर कोई नहीं पसीजा . आगे रामबालक और कोई निर्णय ले पाता,उसके पहले ही मासूम रौशन ने कंधे पर अंतिम सांस ले ली . रामबालक रो रहा था,औरत छाती पीट रही थी,पर अब कुछ भी नहीं होना था . जो नहीं होना चाहिए था,वह एम्‍स,पटना के कारण हो चुका था .

रामबालक की परेशानी अब और बढ़ गई थी . समस्‍या थी कि वह मृत बेटी को पटना जंक्‍शन तक लेकर जाए कैसे . एम्‍स वाले तमाशा देख इधर-उधर होते रहे,लेकिन मृत रौशन को जंक्‍शन तक पहुंचाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला . आखिरकार,मृत बेटी को लेकर रामबालक पैदल ही रोते-धोते चल पड़ा . पास में इतने पैसे भी नहीं थे कि कोई टेम्‍पो-सेम्‍पों रिजर्व कर लेता . उसने कई टेम्‍पो वालों से जंक्‍शन पहुंचा देने की मिन्‍नत की,पर कोई नहीं माना .

चार किलोमीटर तक रामबालक मृत बेटी को कंधे पर लेकर पत्‍नी संग फुलवारी के शहीद चौक तक पहुंचा . यहां फिर से वह टेम्‍पो वालों को हाथ जोड़ रहा था,पर कोई सुनवाई नहीं हो रही थी . तब अचानक पटना के ट्राफिक डीएसपी ओमप्रकाश चौधरी की नजर परेशान रामबालक पर पड़ी . कहानी सुन वे जरुर पिघले और व्‍यवस्‍था करा स्‍टेशन तक पहुंचा दिया . रामबालक मृत बेटी के साथ लखीसराय भी अब पहुंच गया होगा,शायद अंत्‍येष्टि भी हो गई होगी,लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह कि मासूम रौशन की बिना इलाज मौत के लिए एम्‍स,पटना नहीं तो और कौन जिम्‍मेवार है ?