नहीं रहे पद्मश्री गजेंद्र नारायण सिंह, सहरसा के रहने वाले थे

लाइव सिटीज डेस्क : पद्मश्री गजेंद्र नारायण सिंह का सोमवार को निधन हो गया. कला के क्षेत्र में गजेंद्र नारायण सिंह ने शानदार योगदान दिया था. उन्हें वर्ष 2007 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. वे बिहार संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष भी रहे हैं. गजेंद्र नारायण सिंह मूल रूप से बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले थे. उनका मानना था कि मीडिया सभ्यता-संस्कृति और धरोहरों का दर्पण है. आज समाज के मनोरंजक पहलुओं को समानता की धागे में बाधने की दरकार है.

बिहार में संगीत परम्परा, महफिलें इनकी चर्चित किताब है. बिहार में संगीत परंपरा उनकी ऑटोबायोग्राफी है, जिसे 2014 में दिल्ली पब्लिक स्कूल ने पब्लिश किया था. बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम के फिल्म क्लब द्वारा आयोजित एक सेमिनार में कहा था कि भारतीय सिनेमा में संगीत का एक समृद्ध इतिहास रहा है लेकिन दुख की बात है कि आज के फिल्मी संगीत में वह तासीर नहीं बची है, जिस संगीत से भारतीय सिनेमा की पहचान थी.

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मॉरिसन भवन में हुए सिने संवाद में प्रसिद्ध संगीत संरक्षण पद्मश्री गजेंद्र नारायण सिंह ने कहा था कि भारतीय सिनेमा दुनिया भर में अपने गीत संगीत और नृत्य के कारण एक अलग पहचान रखता है. इसके नींव में ही संगीत रहा है. मूक दौर में भी यह संगीत से अलग नहीं था.

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जब बोलना शुरू किया तो इस विधा का मुखर रूप से विस्तार हुआ. सिनेमा में सांगीतिक रोचकता और रौनक प्रदान करने में सलिल चौधरी, सी रामचंद्रन, मदन मोहन, नौशाद जैसे संगीतकारों का विशेष योगदान रहा है.

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