लोजपा संसदीय दल का नेता चुने के बाद पहली बार पटना पहुंचे पशुपति पारस, एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं ने गाजे-बाजे से किया स्वागत

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: लोजपा संसदीय दल का नेता चुने के बाद पहली बार पशुपति कुमार पारस पटना पहुंचे. पटना एयरपोर्ट पर समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया. बैंड-बाजा के साथ कार्यकर्ताओं ने उनकी आगवानी की. स्वागत के लिए पशुपति समर्थकों में काफी जोश देखने को मिला. पशुपति के साथ कार्यकारी अध्यक्ष सूरजभान सिंह भी मौजूद रहे. एयरपोर्ट के बाहर उन्होंने हाथ हिलाकर अपने समर्थकों का अभिवादन किया. हालांकि मीडिया वालों ने कुछ सवालों का जवाब लेनी चाहा, लेकिन पशुपति बिना कुछ बोले निकल गए.

एयरपोर्ट के बाद कार्यकारी अध्यक्ष सूरजभान सिंह ने कहा चिराग ने पार्टी को बहुत दिन तक चलाया. अब उनके चाचा को भी चलाने का मौका मिलना चाहिए. वहीं कल होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चिराग के बुलाने की बात पर उन्होंने कहा कि उन्हें सदबुद्धी आए की वो बैठक में शामिल हो जाए.

बता दें कि  पशुपति गुट के द्वारा लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कल चयन किया जाएगा. इसको लेकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलायी गयी है. जिसमें सभी राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य, प्रदेश कार्यकारिणी, सभी प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, लोजपा जिलाध्यक्षों, दलित सेना के प्रदेश एवं जिलाध्यक्षों एवं विशेष आमंत्रित सदस्य, पार्टी के तमाम वरिष्ठ साथियों को आमंत्रित किया गया है.

लोजपा के कार्यकारी अध्यक्ष सूरजभान सिंह के पटना स्थित आवास पर सुबह 11 बजे बैठक बुलायी गयी है. जिसमें वोटिंग या सर्वसम्मति के साथ अध्यक्ष का चयन किया जाएगा. इधर चिराग पासवान ने दिल्ली में पीसी कर कहा कि चाचा पशुपति को लोकसभा में संसदीय दल का नेता चुनाव पार्टी संविधान के अनुसार गलत है. इसको लेकर मैंने लोकसभा अध्यक्ष को फिर से विचार करने का आग्रह किया है.

वहीं लोजपा में उठे बवंडर पर सफाई देते हुए चिराग पासवान ने कहा कि अक्टूबर 2020 में पिता जी का निधन हुआ, उसके तुरंत बाद चुनाव में उतरने का मौका मिला. व्यवस्तता इतनी ज्यादा थी की परिवार के साथ बैठकर पिता को याद भी नहीं कर सका. 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा को बड़ी जीत हासिल हुई. मत प्रतिशत के हिसाब में लोजपा को ज्यादा वोट मिले. अच्छा प्रदर्शन रहा. हमलोग ने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया.

मजबूती से 2020 का हमलोगों ने चुनाव लड़ा. मेरी पार्टी को पापा के समय से भी तोड़ने का प्रयास किया जाता रहा है. पार्टी में कुछ लोग संघर्ष के रास्ते पर चलने के लिए तैयार नहीं हुए, कंफर्ट के रास्ते पर चलने के लिए तैयार रहे. उन्होंने यह भी कहा कि 2020 में अगर जेडीयू, बीजेपी और लोजपा साथ लड़ती तो निश्चित सफलता और बड़ी होती. लेकिन इसके लिए मुझे समझौता करना पड़ता. जो मंजूर नहीं था.

बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट के लोजपा के एजेड़ों को जेडीयू ने दरकिनार कर दिया. इसलिए हमलोगों ने अलग रास्ता चयन किया. पूरे विश्वास के साथ संगठन को लेकर मैंने चुनाव लड़ा. हमारी पार्टी के कुछ लोग अपने-अपने लोगों के लिए अलग-अलग चुनाव लड़ रहे थे. उस समय ही अंदेशा हो गया कि पार्टी को आने वाले दिनों में इन सारी समस्याओं से जुझना पड़ेगा.

जब मैं बीमार था उस समय मेरे पीछे षडयंत्र रचने का प्रयास किया गया. मैं निरंतर अपने चाचा से संपर्क करने का प्रयास किया. होली के दिन मेरे अपने मेरे साथ नहीं थे. जिसका जिक्र हमने अपने पत्र में किया है. मैंने अंत-अंत तक पार्टी और परिवार को एक साथ रखने का प्रयास किया. कल दोपहर अंत तक चाचा से संपर्क करने का प्रयास किया. अंत में मैंने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलायी.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के संविधान के अनुसार बागी नेताओं को पार्टी से निकालना पड़ा. मैं खुशी-खुशी चाचा को लोकसभा में संसदीय दल के नेता का पद दे देता. जिस तरीके से चाचा को दल का नेता चुना गया वो पार्टी के संविधान के अनुसार गलत है. लोजपा के संविधान के अनुसार अध्यक्ष या संसदीय दल की बैठक में दल का नेता तय होता है ना कि लोकसभा की ओर से इसकी मान्यता दी जाएगी.