डॉक्टरों की हड़ताल के कारण अस्पतालों में भटकते रहे मरीज, नहीं हो पाया इलाज, केन्द्र के फैसले का विरोध

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : राजधानी में डॉक्टरों की हड़ताल ने मरीजों को मुसीबत में डाल दिया. इस हड़ताल ने कई प्रकार की समस्याओं को न्योता दे दिया. हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवा व कोरोना का इलाज बाधित नहीं हुआ. मगर बावजूद इसके दूर से आये मरीजों की फजीहत खूब हुई. पटना के कई प्रमुख अस्पतालों में इलाज के लिए मरीज भटकते रहे. डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर अस्पतालों की ओपीडी पूरी तरह से ठप रही.

पीएमसीएच में दूर दराज से इलाज के लिए आए मरीज अस्पताल में परेशान हाल भटकते रहें.  दानापुर से आए मरीज की पर्ची तो काट दी लेकिन इलाज नहीं हुआ. पटना मेडिकल कालेज में 256 रजिस्ट्रेशन साढ़े नौ बजे तक हुआ था. इसके बाद डॉक्टर आकर रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद करा दिए. कई मरीज  इलाज के लिए  भटकते रहें. ओपीडी में जो मरीज बहुत गंभीर थे. उन्हें मानवता के नाते देख लिया गया.



पटना के पीएमसीएच के ओपीडी में रोज औसतन 2000 मरीज आते हैं.  पटना के अन्य सरकारी अस्पतालों के ओपीडी मिलाकर कुल पांच हजार मरीजों के इलाज पर हड़ताल का असर पड़ा शुक्रवार को हड़ताल के बाद शनिवार को एक दिन ओपीडी होगा फिर रविवार को ओपीडी बंद रहेगा. सोमवार से ही ओपीडी व्यवस्थित तरीके से चल पाएगा. हड़ताल के कारण कई मरीज कराह रहे थे. लेकिन उनका इलाज नहीं हो रहा था. हड़ताल का असर पटना के लगभग सभी अस्पतालों पर पड़ा. सुबह से ही मरीजों की  लाइन लगी मगर उनका लइाज नहीं हो पाया.

आइएमए बिहार के पूर्व अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद प्रसाद ने बताया कि प्रदेश के 35 हजार डॉक्टरों ने पहले से ही हड़ताल की तैयारी कर ली. सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में इमरजेंसी सेवा छोड़ कोई भी काम नहीं हुआ. वाह्य चिकित्सा सेवा को पूरी तरह से शटडाउन कर दिया  गया. सुबह 6 से शाम को 6 बजे तक डॉक्टर पूरी तरह से हड़ताल पर रहें. डॉ सच्चिदानंद का कहना है कि मिक्सोपैथी ऑफ एनएमसी, आयुर्वेद के डॉक्टरों को सर्जरी करने का अधिकार देना गलत है. यह मरीजों के हित में नहीं है. इसी कारण से डॉक्टरों ने शुक्रवार को सुबह 6 से शाम 6 बजे तक हड़ताल का फैसला लिया है.