दलितों को सरकारी टेंडरों में 50 प्रतिशत आरक्षण सही : हाईकोर्ट

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फाइल फोटो

पटना (एहतेशाम) : 15 लाख रुपये तक के सरकारी ठेके में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के ठेकेदारों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने के सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए पटना उच्च न्यायालय ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें क्रीमी लेयर के लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाय. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खण्डपीठ ने सपना सिंह की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई पूरी कर रखे गये सुरक्षित आदेश में गुरुवार को अपना फैसला सुनाया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जीतन राम मांझी सरकार द्वारा पीडब्ल्यूडी के 15 लाख रुपये तक की निविदाओं में दलितों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया जो कि सरासर गलत है.

धर्मिक स्थलों में तोड़फोड़ पर सरकार से जवाब-तलब

उधर एक अन्य मामले में छपरा शहर में गत वर्ष धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ किये जाने, सामानों को क्षति पहुंचाने, दुकानो में लूटपाट करने एवं आग लगाकर धर्मिक उन्माद फैलाने के विरूद्ध दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह की खण्डपीठ ने नाजिया सुल्ताना एवं अन्य की ओर से दायर लोकहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि छपरा जिला में विभिन्न स्थानों पर 31 जुलाई 2016 से 09 अगस्त 2016 के मध्य बजरंग दल द्वारा छपरा शहर के विभिन्न स्थानों पर अवस्थित धार्मिक स्थलों में तोड़-फोड़, आगजनी एवं लूटपाट कर करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचायी गयी. इसको लेकर करीब 43 प्राथमिकी भी दर्ज की गयी है, परंतु अब तक पुलिस द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. अदालत को यह भी बताया गया कि यह घटना उन्मादी संगठन और स्थानीय पुलिस प्रशासन के वरीय पदाधिकारियों की मिलीभगत से घटित हुई है. इसलिए इस घटना की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा या फिर एसआईटी गठित कर करायी जाये.

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