पटना में लगे पोस्टर पर सियासत तेज, आरजेडी ने सीएम नीतीश की बेबसी को दर्शाया, जेडीयू ने किया पलटवार

लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क : 2020 के आखिरी दिन एक पोस्टर ने सियासत को गरम कर दिया है. पटना के मुख्य चौराहे पर एक पोस्टर लगा है, जिसको लेकर सियारी पारा अचानक से चढ़ गया. पोस्टर के माध्यम से आरजेडी निशाना साधने में जुट गया है तो जेडीयू खेमा इसको नकारने में लगा हुआ है. बिहार की नयी सरकार लगातार अपनी स्थिरता को लेकर प्रमाण देती नजर आ रही है तो विपक्ष अपना पूरा दमखम सरकार को अस्थिर बताने में लगा दिया है.

बिहार में एनडीए की सरकार तो बन गयी है मगर कयास ये लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार कमजोर पड़ गए हैं. उनकी पार्टी को आई कम सीट ने उन्हें बड़े से छोटे भाई की भूमिका में ला खड़ा कर दिया है. बीजेपी इस सरकार में इस कदर हावी हुई है कि अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के विधायकों को ही तोड़ लिया.अब इन सबके बाद मुख्य विपक्षी दल के दावे शुरू हो गए और जेडीयू के 17 विधायकों के साथ का दावा करने लगे, जिसका खंडन स्वयं मुख्यमंत्री को करना पड़ा.अब ऐसे हालात को भला विपक्ष कैसे ना तूल देती और राजद ने नीतीश कुमार की बेचारगी वाले पोस्टर लगाने भी शुरू कर दिए हैं.



पोस्टर में लिखा है ‘अरुणाचल प्रदेश तो झांकी था, इ कुर्सिया त अभी बाकी था, काटो जोर लगके’ ‘वोट हल्का कुर्सी भारी, हल्का करो चलाके गाड़ी’ ‘हमको भी बिहार में आत्म निर्भर बनने दीजिए’ इन जुमलों से सजे पोस्टर लगाने वाले आरजेडी नेता और युवा राजद के महासचिव ऋषि यादव ने कहा कि पोस्टर में वही बातें दर्शायी गयी है जो वर्तमान समय में नीतीश कुमार की स्थिति है.

पोस्टर पर जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि आरजेडी को जद यू की ताकत का एहसास नही है. चुनाव की हार के बाद ये बेचेनी है तेजस्वी यादव की जो अपने लोगों से ये सब करवा रहे हैं और बयान भी दिलवा रहे हैं. लेकिन उन्हें मालूम होनी चाहिए कि बीजेपी जेडीयू के रिश्ते इतने मजबूत है कि ऐसे पोस्टर से हिलने वाला नहीं है. उधर आरजेडी के पोस्टर हमले पर उप मुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद ने जेडीयू का बचाव करते हुए कहा कि ये आरजेडी वाले एक्जिट पोल सिंड्रोम से निकल नही पाए हैं. वहीं श्रम संसाधन मंत्री जीवेश मिश्रा ने कहा कि नकारे लोगों के पास अब कोई काम नही है.