SSC CGL Tier 2 का जानें सिलेबस और परीक्षा पैटर्न, आसानी से कर पाएंगे तैयारी

लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क: SSC CGL स्नातक पास छात्रों के लिए आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक है. SSC CGL चार टियर स्तरीय परीक्षा है, जिसका टियर 1 कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 13 अगस्त से 24 अगस्त 2021 के बीच आयोजित किया जा चुका है. वहीं अब टियर 2 परीक्षा 28 और 29 जनवरी 2022 को होगी. इस परीक्षा को अब बेहद कम समय रह गया है. इसलिए जरूरी है कि उम्मीदवार परीक्षा का पैटर्न और सिलेबस की पूरी जानकारी रखें. आज हम SSC CGL टीयर 2 परीक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारियां देने जा रहे हैं जिसके माध्यम से छात्र अपनी परीक्षा तैयारी कर आसानी से कर सकेंगे.

SSC CGL टियर 2 परीक्षा का पैटर्न

परीक्षा में टोटल 4 पेपर होंगे, सभी में 200 अंक के 100 प्रश्न पूछे जाएंगे. पेपर हल करने के लिए उम्मीदवारों को 2 घंटे का समय मिलेगा. पेपर-1 और पेपर-2 सभी पदों के लिए अनिवार्य हैं. पेपर-3 केवल “सांख्यिकीय अन्वेषक ग्रेड II” और “कंपाइलर” के पद के लिए है. पेपर -4 केवल “सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी(Assistant Audit Officer)” के पद के लिए है. प्रश्न का गलत उत्तर देने पर पेपर-1,3,4 में 0.5 अंक और पेपर-2 में 0.25 अंक काटा जाएगा. पेपर-I में प्रश्न 10वीं कक्षा के लेवल के, पेपर-2 10+2 लेवल के और पेपर-3 और 4 में ग्रेजुएशन लेवल के होंगे. आयोग द्वारा इस प्रयोजन के लिए अधिसूचित केन्द्र/स्थल पर कम्प्यूटर उपलब्ध कराया जाएगा. उम्मीदवारों को अपना कीबोर्ड लाने की अनुमति नहीं होगी. वहीं दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए परीक्षा की अवधि 2 घंटे 40 मिनट है.

SSC CGL टियर-2 का सिलेबस

पेपर 1- संख्यात्मक योग्यता: पूर्ण संख्या, दशमलव, भिन्न, प्रतिशत, अनुपात और समानुपात, वर्गमूल, औसत, ब्याज, लाभ और हानि, छूट (बट्टा), मिश्र संख्या और मिश्रानुपात, समय और दूरी, समय और कार्य, सरल बीजगणित, त्रिभुज, चतुर्भुज, बहुभुज, वृत्त, लंब प्रिज्म, लंब वृत्तीय शंकु, लंब वृत्तीय बेलन, गोला, समांतर चतुर्भुज, त्रिकोणमितीय अनुपात, डिग्री और रेडियन माप, मानक समरूपता, संपूरक कोण, ऊंचाई और दूरी, हिस्टोग्राम, आवृत्ति बहुभुज, बार डायग्राम और पाई चार्ट आदि।

पेपर 2- अंग्रेजी भाषा और कॉम्प्रिहेंशन: स्पॉट द एरर, फिल इन द ब्लैंक्स, सिनोनिम्स, एनटोनिम्स, स्पेलिंग करेक्शन, आइडम्स एंड फ्रेज, वन वर्ड सबस्टिच्यूशन, इम्प्रूवमेंट ऑफ सेनटेंस, एक्टिव एंड पेशिव वॉइस, कन्वर्जन इनटू डाइरेक्ट/इनडायरेक्ट नेरेशन, सफलिंग ऑफ सेनटेंस पार्ट्स, क्लोज पैसेज, कॉम्प्रिहेंशन पैसेज, आदि.

पेपर 3- सांख्यिकी: सांख्यिकीय डेटा का संग्रह, वर्गीकरण और प्रस्तुति, डेटा संग्रह के तरीके, डेटा का सारणीकरण, रेखांकन और चार्ट, वितरण आवृत्ति, डायग्राम के रूप में, केंद्रीय प्रवृत्ति का माप, प्रसार का माप, सापेक्ष प्रसार का माप, क्षण, तिरछापन और कुर्टोसिस, सहसंबंध और प्रतिगमन, स्पीयरमैन का रैंक सहसंबंध, विशेषताओं के जुड़ाव का माप, बहु-प्रतिगमन, बहु और आंशिक में संबंध, संभाव्यता सिद्धांत, संभाव्यता के उपयोग, यादृच्छिक चर से आशा और विविधता, यादृच्छिक चर के उच्च बिंदु, द्विपद, पॉसन, सामान्य और घातीय वितरण, दो यादृच्छिक चर का संयुक्त वितरण (असतत), नमूना सिद्धांत, नमूना और गैर-नमूना संबंधी त्रुटियां, नमूना वितरण (केवल कथन), नमूना आकार निर्णय, सांख्यिकीय निष्कर्ष, अनुमान की विधि, परिकल्पना परीक्षण, परीक्षण की मूल अवधारणा, छोटा नमूना और बड़ा नमूना परीक्षण, जेड, टी, ची-स्क्वायर और एफ स्टैटिस्टिक्स पर आधारित टेस्ट, कॉन्फिडेंस इंटरवल, विचलन का विश्लेषण, समय श्रृंखला विश्लेषण, इंडेक्स संख्या आदि.

पेपर 4 – वित्त और अर्थशास्त्र

भाग ए: वित्त और लेखा – प्रकृति और अवसर, मौलिक सिद्धांत और लेखांकन की मूल अवधारणा, वित्तीय लेखांकन की सीमाएं, बुनियादी अवधारणाएं और रूढ़ियां, आम तौर पर स्वीकृत लेखांकन सिद्धांत, लेखांकन की मूल अवधारणा, ओरिजनल एंट्री की बुक, बैंक समाधान, जर्नल, लेजर, ट्रायल बैलेंस, त्रुटियों का सुधार, विनिर्माण, व्यापार, लाभ और हानि समायोजन खाता, बैलेंस शीट, पूंजी और राजस्व व्यय में अंतर, मूल्यह्रास लेखांकन, इन्वेंटरी का मूल्यांकन, गैर-लाभकारी संगठन के खाते, प्राप्ति और भुगतान, आय और व्यय खाता, विनिमय का बिल, सेल्फ बैलेंसिंग लेजर.

भाग बी: अर्थशास्त्र और प्रशासन, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक- संवैधानिक प्रावधान, भूमिका और जिम्मेदारी, वित्त आयोग, अर्थशास्त्र की मूल अवधारणा और मैक्रोइकॉनॉमिक्स से परिचय, मांग और आपूर्ति का सिद्धांत, उपभोक्ता के व्यवहार का मार्शल सिद्धांत और उदासीनता वक्र दृष्टिकोण का सिद्धांत, आपूर्ति के अर्थ और निर्धारक, आपूर्ति का कानून और आपूर्ति का लोच, उत्पादन और लागत का सिद्धांत, उत्पादन के नियम, बाजारों के विभिन्न रूप और विभिन्न बाजारों में मूल्य निर्धारण, भारतीय अर्थव्यवस्था, भारत की राष्ट्रीय आय, आबादी, गरीबी और बेरोजगारी, बुनियादी ढांचा, भारत में आर्थिक सुधार, वाणिज्यिक बैंक/आरबीआई/भुगतान बैंकों के कार्य, बजट और राजकोषीय घाटा और भुगतान संतुलन, राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003, प्रशासन में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका आदि.