प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में देश से की अपील- लोकल खिलौनों के लिए वोकल बनना है

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं. मन की बात में पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में नागरिकों में अपने दायित्वों का अहसास है. हर तरह के उत्सवों में लोग संयम बरत रहे हैं. देश में हो रहे हर आयोजन में जिस तरह का संयम और सादगी इस बार देखी जा रही है, वो अभूतपूर्व है.

पीएम मोदी ने कहा कि हम बहुत बारीकी से अगर देखेंगे, तो एक बात अवश्य हमारे सामने आएगी- हमारे पर्व और पर्यावरण. इन दोनों के बीच एक बहुत गहरा नाता है. बिहार के पश्चिमी चंपारण में सदियों से थारू आदिवासी समाज के लोग 60 घंटे के लॉकडाउन, उनके शब्दों में ‘60 घंटे के बरना’ का पालन करते हैं. प्रकृति की रक्षा के लिए बरना को थारू समाज के लोगों ने अपनी परंपरा का हिस्सा बना लिया है और ये सदियों से है.



पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दिनों बाद, पांच सितम्बर को हम शिक्षक दिवस मनायेगें. हम सब जब अपने जीवन की सफलताओं को अपनी जीवन यात्रा को देखते है तो हमें अपने किसी न किसी शिक्षक की याद अवश्य आती है.

मन की बात में पीएम मोदी ने आगे कहा कि खिलौनों का केन्द्र बहुत व्यापक है. गृह उद्योग हो, छोटे और लघु उद्योग हो, एमएसएमई हों, इसके साथ-साथ बड़े उद्योग और निजी उद्यमी भी इसके दायरे में आते हैं. इसे आगे बढ़ाने के लिए देश को मिलकर मेहनत करनी होगी. खिलौना वो हो जिसकी मौजूदगी में बचपन खिले भी, खिलखिलाए भी. हम ऐसे खिलौने बनाएं, जो पर्यावरण के भी अनुकूल हों. मैं देश के युवा टैलेंट से कहता हूं. आप, भारत में भी गेम्स बनाइये. भारत के भी गेम्स बनाइये. कहा भी जाता है- लेट दी गेम्स बिगेन! तो चलो, खेल शुरू करते हैं !

मन की बात में पीएम मोदी ने आगे कहा कि हमारे चिंतन का विषय था- खिलौने और विशेषकर भारतीय खिलौने. हमने इस बात पर मंथन किया कि भारत के बच्चों को नए-नए खिलौने कैसे मिलें, भारत, खिलौने बनाना का बहुत बड़ा हब कैसे बने. उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ सुन रहे बच्चों के माता-पिता से क्षमा मांगता हूं, क्योंकि हो सकता है, उन्हें, अब, ये ‘मन की बात’ सुनने के बाद खिलौनों की नयी-नयी मांग सुनने का शायद एक नया काम सामने आ जाएगा.

मन की बात में पीएम मोदी ने आगे कहा कि किसानों की शक्ति से ही तो हमारा जीवन, हमारा समाज चलता है. हमारे पर्व किसानों के परिश्रम से ही रंग-बिरंगे बनते हैं. अन्नानां पतये नमः, क्षेत्राणाम पतये नमः. अर्थात, अन्नदाता को नमन है, किसान को नमन है. हमारे देश में इस बार खरीफ की फसल की बुआई पिछले साल के मुकाबले 7 प्रतिशत ज्यादा हुई है. मैं, इसके लिए देश के किसानों को बधाई देता हूँ, उनके परिश्रम को नमन करता हूं.