रघुवंश ने तेजस्वी को याद दिलाया लालू का सवर्ण आरक्षण वाला वादा, बोले – संसद में हुई चूक

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्कः सर्वण आरक्षण बीजेपी के लिए जितना बड़ा गेम चेंजर हो सकता है तो उससे ज्यादा शायद आरजेडी को डैमज करने वाली राजनीति भी. आरजेडी वो पार्टी थी जिसने सर्वण आरक्षण का दोनों सदनों में विरोध किया था. यहां तक कि आरजेडी के तरफ से मनोज झा ने राज्यसभा में इस आरक्षण को झुनझुना तक बता दिया. आरजेडी के विरोध के बाद लगातार ये सवाल उठने लगे थे कि लालू यादव की पार्टी से भूल हुई या जान बूझ कर ऐसा किया गया.

अब इसके भी दो पहलू हो सकते हैं. एक तो अगर जानबूझ कर किया गया तो ये तय है कि उनसे उनके वोटर कभी झिटकेंगे नहीं वो और भी मजबूत होंगे और दूसरा ये भी आरजेडी को लगता होगा कि सर्वण आरक्षण होने के बाद भी जातीय गणना उनके पक्ष में है इसलिए उन पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता. क्यों कि अगर ऐसा होता तो तेजस्वी सर्वण आरक्षण लागू होने के बाद भी विरोध करते नजर नहीं आते.

तेजस्वी का स्टैंड साफ था कि वो सर्वण आरक्षण का विरोध कर रहे थे लेकिन अब मामला कुछ अलग है. तेजस्वी के इस लाइन के खिलाफ में खुद राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ रधुवंश प्रसाद सिंह उतर गए हैं. रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी लाइन अलग जाते हुए कहा है कि सर्वण आरक्षण के मसले पर राजद से संसद में चूक हो गई. क्या रधुवंश प्रसाद सिंह डैमेज कंट्रोल में लगे हैं. रघुवंश प्रसाद सिंह ने ये कहा कि दरअसल केंद्र सरकार ने इतनी हड़बड़ी में आरक्षण प्रस्ताव पेश कराया कि पार्टी को निर्णय लेना पड़ा, विचार- विर्मश नहीं हो पाया. राजद को आइसोलेशन में नहीं जाना चाहिए.

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद सवर्ण आरक्षण के विरोधी नहीं हैं. राजद सम्मेलन में इसके समर्थन में प्रस्ताव आया था. राजद के मेनिफेस्टो में भी सवर्ण आरक्षण की बात है. अब मेनिफेस्टो खोजा जा रहा है. वैसे भी संसद में बहस के दौरान अधिकांश दलों ने सवर्ण आरक्षण देने के तरीके का विरोध किया था. सबने भाषण में विरोध किया पर वोट समर्थन में दिया. राजद ने भी तरीके का विरोध किया पर वोटिंग में गलती हो गई. ऐसा करने की मंशा पार्टी की नहीं थी.

रघुवंश प्रसाद के इस बयान से साफ है कि वो पार्टी को डैमेज कंट्रोल से बचाने में लगे हैं और आने वाले दिनों में शायद पार्टी का स्टैंड भी बदल जाए. लेकिन तेजस्वी के पहले के बयानों से ऐसा लगता हुआ नहीं दिख रहा है. खैर बिहार में अभी तक सर्वण आरक्षण लागू नहीं हुआ है. ऐसे में लालू की पार्टी के पास समय है कि वो इसका सपोर्ट कर सकें या सर्वण आरक्षण का विरोध कर अपनी राजनीति को एक नई धार दें.

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