महागठबंधन में मांझी पड़े अकेले, रालोसपा को तेजस्वी के नाम पर ऐतराज नहीं

लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क : बिहार महागठबंधन की बेपटरी हुई रिश्तों की गाड़ी अब धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी है. दिल्ली में मुकेश सहनी ने कांग्रेस नेता अहमद पटेल से मुलाकात कर गठबंधन में पड़ी धूल को हटाने का प्रयास किया. मुलाकात बाद उन्होंने कहा कि बिहार महागठबंधन में पड़ी गांठ जल्द ही खुल जाएगी. वहीं आज रालोसपा सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा ने तेजस्वी के नाम पर अपने विरोध को वापस ले लिया.

कल तक तेजस्वी के सीएम फेस पर ऐतराज जताने वाले उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा है कि तेजस्वी को सीएम प्रोजेक्ट करने पर उन्हें कभी ऐतराज नहीं रहा है. बशर्ते इस मामले पर महागठबंधन के सभी दलों को साथ बैठकर फैसला लेना चाहिए.



रालोसपा सुप्रीमो की ओर से इस प्रकार के बयान आने के बाद अब जीतन राम मांझी अकेले पड़ गए हैं. जीतन राम मांझी बहुत पहले से ही महागठबंधन में को-ऑर्डिनेशन कमिटी बनाने की मांग करते रहे लेकिन उनकी मांग को आरजेडी ने दरकिनार करते हुए उनकी एक ना सुनी.

आरजेडी के अनदेखी से खफा मांझी ने 25 जून तक कमिटी गठन करने का अल्टीमेटम भी दिया लेकिन इसका भी असर आरजेडी पर नहीं हुआ. इसके बाद मांझी ने अपने पार्टी नेताओं से साथ विचार विमर्श कर कहा कि जल्द ही वो कोई बड़ा फैसला करेंगे.

वहीं गया में पार्टी के वर्चुअल संवाद कार्यक्रम के दौरान मांझी ने कहा कि बिहार का अगला सीएम महादलित समाज से होना चाहिए. इस राग को छेड़कर मांझी ने तेजस्वी को महागठबंधन का नेता मानने से इंकार कर दिया.

बता दें कि वीआईपी पहले से तेजस्वी यादव में अपनी आस्था जता चुकी है. अब रालोसपा ने भी तेजस्वी के नाम मुहर लगा दी है. अब देखना होगा कांग्रेस का क्या रूख होता है. क्योंकि बिहार में आरजेडी के बाद कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी हैं.