नए RBI गर्वनर से बहुत खुश हैं रवीश कुमार, बोले- ‘मैं भी इतिहास का छात्र, मेरा भी नंबर आएगा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया के पूर्व गर्वनर उर्जित पटेल के द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने शक्तिकांत दास को आरबीआई का नया गवर्नर बनाया है. आपको बता दें कि ये वहीं शक्ति कांत दास हैं जो मोदी सरकार द्वारा 2016 में किए गए नोटबंदी के समय मुख्य भूमिका में थे. शक्तिकांत दास मोदी सरकार में फाईनेंस मामलों के सेक्रेटरी रह चुके हैं. उनके इस पद पर रहने के दौरान हीं नोटबंदी हुई थी.

विवादों में घिरा शक्तिकांत की नियुक्ती

शक्तिकांत दास मौजूदा समय में पंद्रहवे वित्त आयोग के मेंबर हैं. अब सरकार ने उन्हे देश के सबसे बड़े बैंक का गर्वनर नियुक्त किया है. शक्तिकांद दास की नियुक्ती के बाद मोदी सरकार एक बार फिर से विवादों में घिर गई हैं. दरअसर शक्तिकांत दास का बैकग्राउंड इतिहास से जुड़ा रहा है, उनका फाईनेेंस या इकोनॉमिक्स से कोई लेना देना नहीं है. ऐसे में सरकार द्वारा उन्हें आरबीआई के गवर्नर पद पर चुन लेना विवादो का कारण बन गया है.



मोदी सरकार के इस कदम को लेकर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने व्यंग्य के रुप में एक पोस्ट लिखा है. अपने फेसबुक पोस्ट पर रवीश कुमार ने मोदी सरकार द्वारा आरबीआई के पोस्ट पर एक इतिहास के बैकग्राउंड के व्यक्ति को चुने जाने को लेकर लिखा कि वो भी इस पद की इच्छा रखते है. आप भी पढ़िए क्या कुछ लिखा है वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट में :—

आर बी आई गवर्नर के लिए मैं क्यों नहीं चुना जा सका

‘RBI के गवर्नर पद के लिए इतिहास के छात्र का चयन हुआ है. मैं इतिहास का छात्र रहा हूँ इसलिए काफ़ी उत्साहित हूँ. अगर मैं स्टूडियो में एंकरिंग न कर रहा होता तो मेरा भी चांस था. सूत्रों को पता लग गया था कि मैं गणित में फिसड्डी भी हूँ. पर तभी इतिहास के एक और छात्र का नाम किसी ने सरकार को सुझा दिया और मेरा पत्ता कट गया. शक्ति कांत दास जी को बधाई. मुझे पूरा भरोसा है कि वे अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले इतिहास के पहले छात्र होंगे.

वैसे एक वेकेंसी और है. अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने  प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की अंशकालिक  सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है. वे अब CNN IBN के सलाहकार बन गए गए हैं.पहले लोग न्यूज़ चैनल छोड़ कर प्रधानमंत्री का सलाहकार बनते थे लेकिन सुरजीत भल्ला ने ट्रेंड बदला है.

जब मीडिया के लिए अर्थव्यवस्था को मैनेज करना है तो क्यों न मीडिया में ही जाकर अर्थव्यवस्था को मैनेज किया जाए. पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम और रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने निजी कारणों से इस्तीफ़ा दिया है लेकिन मैं तो निजी कारणों से ज्वाइन करना चाहता हूँ. मुंबई रहने का बहुत मन है. गवर्नर बनकर ये शौक़ पूरा हो जाता.

फिर भी भल्ला की जगह जो पद खाली हुआ है उसके लिए कोई चाहे तो मेरा नाम सुझा सकता है. तीन मूर्ति में मेरी दिलचस्पी नहीं है. मैं सिर्फ आर्थिक मामलों में दिलचस्पी रखता हूँ. फ़ेसबुक पर आर्थिक मामलों को लेकर कई सौ पोस्ट लिखे हैं. जिन्हें मूल रूप में दूसरों ने लिखा था. आज सही में मिस कर गया. टेम्पो में बैठा रह गया और बगल से बस निकल गई! हिन्दी में लिखा है ताकि लोग मेरी बातों की गंभीरता को व्यंग्य में लें. (ये पोस्ट वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के पोस्ट से लिया गया है)