‘पहले लोग मोदी-मोदी करते थे, अब खुद ही मोदी-मोदी कर रहे हैं’

पीएम मोदी (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज डेस्क : मशहूर पत्रकार रवीश कुमार ने एक और फेसबुक पोस्ट लिखा है. इस बार निशाने पर कई लोग हैं. शुरुआत रेल मंत्री पीयूष गोयल से की है साथ में बिजली का मुद्दा भी है. बाद में पीएम मोदी पर भी जम कर तंज कसा है. आरा सांसद और केंद्रीय मंत्री आर के सिंह की तारीफ भी की है. तो वहीं बीमा कंपनियों पर भी निशाना साधा है. साथ ही गुजरात चुनाव पर भी बोला है. अब आप आगे पढ़ें रवीश कुमार की पूरी पोस्ट

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रवीश कुमार (फाइल फोटो)

बिजली वितरण कंपनियों और सिस्टम को ठीक करने के लिए उदय स्कीम लांच की गई थी। पीयूष गोयल इसकी सफलता पर कितने भाषण दे चुके हैं, अब किसी को याद भी नहीं होगा। इसक लक्ष्य यही था कि बिजली उत्पादन के बाद आपके घरों तक पहुंचने में जो नुकसान होता है उसे जनवरी 2019 तक 15 प्रतिशत तक लाया जाए।



नए बिजली मंत्री आर के सिंह लगता है कि कुछ सच बोलने वाले हैं। पीयूष गोयल की तरह लच्छेदार शब्दों में बातों को बड़ा करने के अभ्यस्त नहीं हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए अपने इंटरव्यू में आर के सिंह ने कहा है कि 16 राज्यों में प्रसारण और वितरण से होने वाला नुकसान 20 प्रतिशत से बढ़कर 56 फीसदी हो गया है। उन्होंने यह तो नहीं कहा कि उदय स्कीम फेल हो गई है मगर सबकुछ उन्हें कहने की ज़रूरत भी नहीं कि उदय स्कीम फेल हो चुकी है। 20 से बढ़कर 56 फीसदी हो जाना…क्या है, सफलता?

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रेल मंत्री पीयूष गोयल (फाइल फोटो)

बीमा कंपनियों के लिए मोटर और स्वास्थ्य के बाद फ़सल बीमा बड़ा बिजनेस है। 2017 के वित्त वर्ष में किसानों ने 21000 करोड़ का प्रीमियम जमा किया है जिसके अगले साल बढ़ने के आसार हैं। 25 से 26 हज़ार करोड़ तक हो सकता है। हिन्दू बिजनेस लाइन की शोभा रॉय ने लिखा है कि कंपनियों को तो फायदा है मगर क्लेम देने की प्रक्रिया काफी जटिल है।

रिपोर्ट में इसके अलाव कोई जानकारी नहीं है। अगर कंपनियां यह बताती है कि 21000 करोड़ प्रीमियम तो लिया मगर कितने किसानों को दिया तो पता चलता। कई जगहों के किसान शिकायत करते हैं। बीमा का क्लेम नहीं मिलता है। फ़सल बीमा ने बीमा कंपनियों के लिए अवसर तो खोल दिया मगर किसानों के लिए नहीं। काम का आंकड़ा कोई नहीं देता है।

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आरके सिंह (फाइल फोटो)

पहली बार अक्तूबर में हवाई यात्रियों की संख्या महीने में एक करोड़ पार कर गई। पिछले साल अक्तूबर की तुलना में करीब 2 लाख ज़्यादा है।

मोर्गन स्टेनली ने कहा है कि जीडीपी दर 7.5 प्रतिशत रहेगी।

रोज़गार के बारे में किसी ने कुछ नहीं कहा है। बिजनेसमैन को रवीश की सलाह- वोटर बनिए कोई नहीं लूटेगा, भक्त बने तो पॉवर खत्म

गुजरात में चुनाव आयोग ने 1 लाख 88 हज़ार लीटर शराब ज़ब्त की है। 20 करोड़ से अधिक कीमत बताई गई है। गुजरात में शराब बंद हैं और वहां कानून व्यवस्था का कोई गुजरात मॉडल बताया जाता है। इतनी शराब कहां से आ जाती है वहां।

गुजरात चुनावों में प्रधानमंत्री यही बोले जा रहे हैं कि उन्हें किस किस ने क्या कहा है। ख़ुद और ख़ुद के नेतृत्व और निर्देशन में आई टी सेल और प्रवक्ताओं ने किस किस को क्या कहा, वो नहीं बता रहे हैं। गुजरात मॉडल की बात कम से कम गुजरात के लोगों को ही सुनाते। उनके भाषणों को सुनकर लगता है कि वह खुद को ही ढो रहे हैं। पहले लोग मोदी मोदी करते थे अब खुद ही मोदी मोदी कर रहे हैं।

गुजरात में उनके भाषणों का संकलन कर राजनीतिक शास्त्र के कोर्स में पढ़ाया जाना चाहिए। हर समय छात्र अच्छे भाषणों का ही संकलन क्यों पढ़ें।

आगामी बजट में आईटी सेल को ही आईटीसेक्टर घोषित कर देना चाहिए। जिसका काम सीडी बनाना हो, बदनाम करना हो, गाली देना हो और हल्ला मचाना हो।