महागठबंधन में ‘रार’ बढ़ी, जदयू ने कहा- भाई वीरेंद्र जैसे संपोले को कुचल दो

पटना(नियाज आलम) : जेडीयू नेता आरसीपी सिंह के लालू प्रसाद के खिलाफ दिए गए बयान से बवाल खड़ा हो गया है. बिहार की सियासत गरमा गई है. महागठबंधन में कोहराम मंचा है. आरजेडी-जेडीयू आमने सामने हैं. दोनों एक दूसरे पर तीखे वार कर रहे हैं. राजनीतिक गुरु कहते हैं कि इससे महागठबंधन में दरार आ सकती है. एकता पर फर्क पड़ सकता है.

हमारे वोटों पर ही राज कर रहा है जेडीयू- भाई वीरेंद्र

बात शुरू हुई लालू परिवार पर बेनामी संपत्ति के आरोपों से. आरसीपी सिंह ने जदयू को वंशवाद का विरोधी बताया. इस पर आरजेडी के भाई वीरेंद्र ने मोर्चा खोल दिया. भाई वीरेंद्र ने कहा कि राजद को कमजोर समझने की भूल जेडीयू न करे. आरसीपी सिंह खुद भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी रहे हैं. उनका रिकॉर्ड बहुत साफ नहीं है. उनके कारनामों की पोटली खुलेगी तो बचना मुश्किल हो जाएगा.

आगे भाई वीरेंद्र ने  कहा कि लालू जी चुनी हुई सरकार को पांच साल तक चलाना चाहते हैं. हमारे वोट पर ही जदयू सरकार में राज कर रहा है. साथ ही कहा कि इस सरकार में राजद के विधायक दुखी हैं, किसी का कोई काम नहीं हो रहा है. जदयू नेता सेटिंग कर अपने लोगों की पोस्टिंग करा रहे हैं. जदयू खुद को कंट्रोल में रखे, ज्यादा बयानबाजी न करें नेता.

भाई वीरेंद्र जैसे सपोलों को कुचल दो

जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने भाई वीरेंद्र के इस बयान पर  पलटवार करते हुए उनको महागठबंधन में संपोला करार दिया है. सिंह ने कहा कि संपोले सांप बनें, उससे पहल उन्हें कुचल देना चाहिए. आरसीपी सिंह पर कोई टिप्पणी जदयू बर्दाश्त नहीं करेगा. महागठबंधन को नीतीश कुमार के चेहरे पर ही जीत मिली. इस बात को आरजेडी न भूले.

उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी में न तो परिवारवाद है और न ही व्यक्तिवाद. हम समूहवाद के सिद्धांत पर काम करते हैं. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर वंशवाद या भ्रष्टाचार के आरोप न तो लगे हैं, और न कभी लगेंगे.

क्या कहा था आरसीपी सिंह ने

जदयू नेता आरसीपी सिंह ने लालू प्रसाद पर लगे आरोपों से किनार किया था. उन्होंने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि जिन पर आरोप लगे हैं..उन्हीं को जवाब भी देना होगा. बीच में जदयू नहीं आता है. आरसीपी सिंह ने जदयू को वंशवाद का विरोधी भी बताया था. बेनामी संपत्ति के सवाल पर उन्होंने कहा कि बेनामी संपत्ति के मामले में हमारा स्टैंड पूरी तरह साफ है. केंद्र सरकार को ऐसे मामलों में कार्रवाई करनी चाहिए.

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