सदन में सीएम नीतीश के गुस्से पर आरजेडी का पलटवार, मनोज झा ने कहा- अहंकार इन्हें ले डूबेगा

लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क : सदन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गुस्से के तरीके पर आरजेडी ने पलटवार किया है. आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि सदन में आज जिस तरीके से नेता प्रतिपक्ष के लिए मुख्यमंत्री नीतीश ने अमर्यादित भाषा का उपयोग किया है. वो कहीं से भी शोभनीय नहीं है. नेता प्रतिपक्ष का पद एक गरिमामयी पद होता है.

मनोज झा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने सदन में जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने का काम किया. नियोजित शिक्षक, जीविका दीदी, आशा कार्यकर्ताओं की समस्या को उठाने का काम किया. लेकिन मुख्यमंत्री को ये बातें चुभ गयी. नेता प्रतिपक्ष ने 1991 में हुई हत्या का मामला उठाया, दूसरा कॉपी राइट कंटेंट की चोरी का मामला उठाया. कॉपी राइट कंटेंट चोरी मामले में उनपर जुर्माना भी हुआ है. ये सारी बातें सीएम को चुभ गयी और उन्होंने अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने लगे.



सदन में सीएम के तेवर पर मनोज झा ने कहा कि आप अनुकम्पा पर सीएम बने हैं. उसके बाद आपकी जुबान इतनी गिरती और फिसलती जा रही है. बिहार विधानसभा का इतिहास आपको कतई माफ नहीं करेगा. सीएम को आईना देखना चाहिए. 40 सीट पर सिमटने के पीछे नीतीश कुमार का अहंकार है. तोते की पूरी जान किसमें अटकी हुई है यह सब जानते हैं.

बता दें कि सदन में तेजस्वी के आरोप पर अचानक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुस्से से तिलमिला गए. उन्होंने अपने सीट से खड़े होकर तेजस्वी के आरोप का जवाब देने लगे. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच करायी जाए, इस मामले में नेता प्रतिपक्ष पर कार्रवाई की जानी चाहिए.

सीएम नीतीश ने कहा कि तेजस्वी के पिता को विधायक दल का नेता किसने बनवाया?. इसे किसने डिप्टी सीएम बनवाया? जब इसपर आरोप लगे तो हमने कहा कि आप एक्सप्लेन करें, लेकिन इन लोगों ने नहीं किया तो हम खुद इनसे अलग हो गए. खुद चार्जशीटेड हैं, फिर भी दूसरे पर आरोप लगाना सहीं नहीं है.

1991 में हत्या के मामले में मुझ पर किसी प्रकार का आरोप नहीं है. हाईकोर्ट ने फैसला दे दिया है. इसके खिलाफ लोग सुप्रीम कोर्ट तक गए. क्या मैं यह सब कर सकता हूं?. आरोप लगाने का सभी को अधिकार है. लेकिन व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप नहीं होना चाहिए. विकास के मुद्दे पर सदन में बहस होनी चाहिए.