रेलवे में बड़े घोटाले की आहट : 972 रुपये की 100 ग्राम दही और 1253 रुपये प्रति लीटर ख़रीदा तेल

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लाइव सिटीज डेस्क : भारतीय रेलवे में एक बड़े घोटाले की आहट मिल रही है. रेलवे के सेंट्रल रेलवे कैटरिंग डिपार्टमेंट में दही 972 रुपये प्रति 100 ग्राम और तेल 1253 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा गया है. डिपार्टमेंट ने इन चीजों को उन पर लिखे अधिकतम विक्रय मूल्य (एमआरपी) से भी कई गुना ज्यादा दर पर खरीदा. यह जानकारी एक RTI से मिली है. हालांकि रेलवे के अधिकारियों ने इसे ‘टाइपिंग एरर’ बताया है.

अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ की एक खबर के अनुसार आरटीआई कार्यकर्ता अजय बोस द्वारा आरटीआई के तहत दूसरी अपील के बाद यह जानकारी हासिल हुई है. रेलवे द्वारा बोस की आरटीआई के जवाब में दी गयी जानकारी के अनुसार मार्च 2016 में 58 लीटर रिफाइंड तेल 72,034 रुपये (1241 रुपये प्रति लीटर) में खरीदा गया था. रेलवे ने टाटा नमक के 150 पैकेट 2670 रुपये (49 रुपये प्रति पैकेट) में खरीदे जबकि नमक के एक पैकेट की एमआरपी 15 रुपये थी. पानी की बोतल और कोल्ड ड्रिंक 59 रुपये प्रति बोतल की दर से खरीदे गए. सेंट्रल रेलवे ने अमूल दही 972 रुपये प्रति 100 ग्राम की दर से खरीदा था जबकि उसकी कीमत 25 रुपये है.

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बोस ने यह भी बताया कि रेलवे ने चिकन, तुर दाल, मूंग दाल, बेसन और टिश्यू पेपर को भी बाजार भाव से काफी अधिक दर पर खरीदा है. 570 किलो तूर दाल 89,610 रुपये (157 रुपये प्रति किलो), 650 किलो चिकन 1,51,586 (233 रुपये प्रति किलो), 148.5 किलो मूंग दाल 89610 रुपये (157 रुपये प्रति किलो) और 178 पानी-कोल्ड ड्रिंक्स के बॉक्स (एक बॉक्स में 10 बोतलें) 106031 रुपये (59 रुपये प्रति बोतल) की दर से खरीदे गए.

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बोस को मिली जानकारी के अनुसार जो चीजें सही दर पर खरीदी गईं वो हैं समोसा, प्याज और आलू. रेलवे के कैटरिंग विभाग द्वारा खरीदी गयी चीजों को सीएसटीएम के गोदाम में रखी जाती हैं और आईआरसीटीसी के जन आहार कैंटिन, रेलवे बेस किचन और डेक्कन क्वीन, कुर्ला-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस इत्यादि ट्रेनों में वितरित की जाती हैं.

अजय बोस ने बताया कि उन्होंने जुलाई 2016 में आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी लेकिन सेंट्रल रेलवे ने उन्हें जो जवाब दिया उसमें कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही थी. उसके बाद बोस ने पहली अपील दायर की. अपीलैट अथॉरिटी ने रेलवे को 15 दिन के अंदर वांछित सूचना देने का आदेश दिया फिर भी बोस को कई महीनों तक सूचना नहीं दी गई. रेलवे की मंशा पर संदेह बढ़ने के कारण बोस ने दोबारा अपील की. तब उन्हें पूरी जानकारी मिली. बोस के अनुसार उन्होंने जब सुना कि रेलवे का कैटरिंग विभाग घाटे में है तब उन्होंने आरटीआई के तहत ये सूचनाएं मांगी थीं.

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रेलवे ने इन विसंगतियों के बारे में अखबार को बताया है कि यह एक ‘टाइपिंग एरर’ हो सकता है. वहीँ एक अन्य अधिकारी ने कहा है कि वो इसकी जांच करायेंगे.

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