इस बार गुलजार होगी सौराठ सभा, लोगों को याद आने लगी है 700 साल पुरानी परंपरा

लाइव सिटीज डेस्क : आज भले ही शादी के लिए दूल्हे-दुल्हन की तलाश हम कई तरह की वेबसाइट से करने लगे हैं. या लड़के खोजने के लिए पंडित या किसी बिचौलिए की मदद लेकर शादी करा रहे हैं. पर, बिहार की अद्भुत धरती मिथिलांचल में शादी को लेकर अनोखी परंपरा रही है. जिसे सौराठ सभा कहते हैं.  बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में प्रतिवर्ष लगने वाला एक विशाल सभा है जिसमें योग्य वर का चुनाव वहाँ आए कन्याओंके पिता करते हैं. बिहार के मिथिलांचल के मधुबनी जिले में 25 जून से सौराठ सभा लगने जा रही है. इसमें लोगों को शामिल करने के लिए इस वर्ष गीतों के जरिए निवेदन किया जा रहा है. 

मिथिलांचल की धरती खुद में कई इतिहास को समेटे हुए है. मिथिला की धरती पर एक ऐसी भी परंपरा है, जो 700 साल पुरानी  है. नाम है सौराठ सभा. इन दिनों बिहार से पलायन कर चुके मिथिलावासियों व पूरे बिहार के लोगों के जुबान पर सौराठ सभा की याद दिलाती गीत ‘प्रीतम नेने चलु हमरो सौराठ सभा यौ’ खूब सुना जा रहा है. यह गीत सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही है.

गौरतलब है कि ‘सौराठ सभा’ में प्राचीन काल से ही दूल्हों की सभा लगती आई है. यह परंपरा आज भी कायम है लेकिन अब इसकी महत्ता को लेकर बहस तेज हो गई है. मिथिवासियों का मानना है कि यह भारतीय संस्कृति को बचाने की एक कवायद है.

दरअसल अब तक पारंपरिक रूप से महिलाएं सौराठ सभा में आने से वंचित रही है और इस गाने के सहारे महिला दहेज विरोधी अभियान में शामिल होने की बात करती नजर आ रही है और आदर्श विवाह पर जोर दिया जा रहा है. इस गाने के प्रसिद्ध लेखक और मिथिलालोक फाउंडेशन के चैयरमैन डॉ. बीरबल झा ने समस्त मिथिलावासियों से अपील की है कि मिथिला की संस्कृति को मजबूत करेने में अपना योगदान दें और सौराठ को विचार-विमर्श का केंद्र बनाएं. इसके लिए उन्होंने अपनी संस्था की ओर से ‘चलू सौराठ सभा’ अभियान भी शुरू किया है.

क्या है सौराठ सभा का इतिहास

सौराठ में शादियां तय करवाने वाले पंजीकार विश्वमोहन चंद्र मिश्र बताते हैं, “मैथिल ब्राह्मणों ने 700 साल पहले करीब सन् 1310 में यह प्रथा शुरू की थी, ताकि विवाह संबंध अच्छे कुलों के बीच तय हो सके. सन् 1971 में यहां करीब डेढ़ लाख लोग आए थे. 1991 में भी करीब पचास हजार लोग आए थे, पर अब आगंतुकों की संख्या काफी घट गई है.”

मिथिलांचल में सामाजिक कार्य करने वाली संस्था ‘मिथिलालोक फाउंडेशन’ के चेयरमैन डॉ. बीरबल झा ने मिथिलांचल में अतिप्राचीन काल से प्रचलित इस वैवाहिक सभा का अस्तित्व बचाए रखने की पुरजोर वकालत करते हैं. उन्होंने अपनी संस्था की ओर से ‘चलू सौराठ सभा’ अभियान शुरू किया है.

सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति से सभा में घट रहे आगंतुक

स्थानीय ग्रामीण कहते हैं कि यह सच है कि इस सभा से अब लोगों का मोहभंग होता जा रहा है. इसका प्रमुख कारण सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति है. उन्होंने कहा कि सौराठ सभा को अब पहले जैसी सुविधाएं, जैसे यातायात, पानी और बिजली आदि नहीं दी जाती.

ग्रामीणों को इस बात का भी मलाल है कि अब बड़े धनी ब्राह्मण यहां नहीं आते. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यहां आने वाले कई लोग अब कन्या पक्ष से दहेज भी मांगने लगे हैं.

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