बिहार कैडर के IAS जितेंद्र गुप्ता अब हरियाणा में देंगे अपनी सेवाएं

लाइव सिटीज डेस्क : घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद फिर बाइज्जत बरी होने वाले आईएएस अधिकारी डॉ जितेंद्र गुप्ता को सुप्रीम कोर्ट से अच्छी खबर मिली है. बिहार कैडर के 2013 बैच के आईएएस अधिकारी गुप्ता ने अपने कैडर को हरियाणा ट्रांसफर करने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी. जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनकी अर्जी मंजूर कर ली. सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को आदेश दिया कि उनका तबादला जल्द से जल्द हरियाणा कैडर में कर दिया जाए. डॉ गुप्ता ने कोर्ट में अर्जी लगाते हुए कहा था कि उन्हें पत्थर माफियाओं से बिहार में खतरा है. उनकी ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई करते हुए को कोर्ट ने यह आदेश जारी कर दिया.  अब वो हरियाणा  कैडर में अपनी सेवाएं देंगे. 

बता दें कि 2013 बैच के आईएएस अधिकारी की पहली पोस्टिंग बिहार में ही हुई थी.  उन्हें घूस लेने के आरोप में जेल भेज दिया गया था.  यह घटना बिहार के कैमुर ज़िले की है जहां 2013 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डॉक्टर जितेंद्र गुप्ता को कुछ ट्रक वालों से घूस लेने के आरोप में राज्य निगरानी विभाग ने गिरफ़्तार किया और निगरानी अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था. अपनी पहली पोस्टिंग में जेल जाने वाले जितेंद्र गुप्ता बिहार के कैमुर ज़िले में एसडीएम की पोस्ट पर कार्यरत थे.



आईएएस गुप्ता पर निगरानी थाने में मामले भी दर्ज कर लिए गए थे. लेकिन हाई कोर्ट ने अपने फैसले में निगरानी के केस को रद्द कर दिया था. साथ ही उन्हें जमानत पर रिहा भी किया था. बता दें कि निगरानी ने उन्हें रिश्वत लेते नहीं पकड़ा लेकिन ट्रक के कागजात सहित अन्य सबूतों के आधार पर उन्हें उनके आवास से दबोचा गया था. यह पाया गया कि उन्होंने ट्रक चालक से बतौर रिश्वत 80 हजार रुपये लिए थे.

गिरफ्तारी के बाद सरकार ने उन्हें उनके पद से निलंबित कर दिया था. 20 जुलाई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निलंबन के फैसले पर मुहर लगा दी. इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया था. 

बाद में राज्यसरकार ने आईएएस अधिकारी डॉ. जितेंद्र गुप्ता के खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही को वापस ले लिया था. सामान्य प्रशासन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका के खारिज होने के बाद यह निर्णय लिया था. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अनुमति याचिका दायर की थी, जिसमें निगरानी विभाग दायर प्राथमिकी को खारिज कर दिया गया था. सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागीय कार्यवाही को समाप्त करते हुए 13 जुलाई, 2016 से 10 अगस्त, 2016 की न्यायिक अभिरक्षा की अवधि को भी कर्तव्य की अवधि मानते हुए नियमित कर दिया है.

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