नीतीश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फटकार, पेंडिंग वेतन पर 4 सप्ताह में मांगा जवाब

लाइव सिटीज डेस्क :बिहार में चल रहे सियासी संग्राम के बीच सुप्रीम कोर्ट  ने भी नीतीश सरकार को एक अन्य मामले में फटकार लगाई है . मामला सरकारी निगमों के कर्मचारियों के वेतन भुगतान न होने से जुड़ा है. वेतन का भुगतान न करने के कारण सरकारी निगमों के सैकड़ों कर्मचारियों की पीड़ा का संज्ञान लेते हुए,  सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से इस राशि का वितरण नहीं किये जाने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है. 

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और दीपक गुप्ता की पीठ ने पीड़ित कर्मचारी द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर नीतीश कुमार सरकार को नोटिस जारी किया. जारी नोटिस के अनुसार अदालत ने सरकार को अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया.

याचिकाकर्ताओं के लिए उपस्थित वकील अमन एम हिंगोरानी ने कहा कि कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को वेतन का भुगतान नहीं हो पाने के कारण गरीबी में जीवन बिताने के लिए मजबूर होना पड़ा और उनमें से कई मरे हुए बिस्तर पर थे. उन्होंने कहा कि 2006 से लगभग 310 कर्मचारियों की मृत्यु हो गई. बता दें कि राज्य सरकार ने उन्हें सर्वोच्च अदालत के निर्देश पर आखिरी बार 2006 में ही अपने बकायों का एक हिस्सा चुकाया था. 

2003 में दिए गए वर्डिक्ट में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निगमों के कर्मचारियों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक दायित्व था और राज्य की देनदारी निगम द्वारा उसके द्वारा आयोजित शेयरों तक सीमित नहीं थी.

अमन एम हिंगोरानी ने कहा -“राज्य सभी स्थितियों में कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने के लिए सीधे या विक्रयशील रूप से उत्तरदायी है, राज्य अपने दायित्व से नहीं बच सकता है. क्योंकि सार्वजानिक क्षेत्र के उपक्रमों के द्वारा कर्मचारियों को लंबे समय तक पैसे नहीं दिए जाने के कारण उनलोगों के बीच भुखमरी या आत्महत्या जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है.

हिंगोरानी ने कहा कि कर्मचारी वेतनमान, सेवानिवृत्ति लाभ और चिकित्सा व्यय का भुगतान न होने के कारण “मर रहे थे” और न्यायालय ने अपने पूर्व के एक फैसले में न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार आवश्यक धन जारी करने के लिए बिहार सरकार को निर्देश दिया था.

याचिका में कहा गया कि अगस्त 2006 में 310 कर्मचारियों की मौत के बाद जस्टिस उदय सिन्हा कमेटी का गठन किया गया जिसने अपने रिपोर्ट में कहा कि राज्य सरकार के पास पर्याप्त फंड नहीं होने की वजह से फरवरी 1 99 7 के बाद से भुगतान नहीं किया जा सकता है.
कर्मचारी ने वेतन के भुगतान के लिए पहले पटना उच्च न्यायालय से संपर्क किया था. एक खंडपीठ ने उनके पक्ष में आदेश दिया था और राज्य को उनके बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया था, लेकिन आदेश को एचसी की डिवीजन बेंच ने अलग कर दिया था, उन्हें आगे बढ़ने के लिए मजबूर किया था.

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