सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- एक्ट में बिना संशोधन नियुक्त हो लोकपाल

लाइव सिटीज डेस्क : लोकपाल की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है. उसने अपने सुनाये गये फैसले में कहा है कि इससे संबंधित एक्ट पर बिना संशोधन के ही काम किया जा सकता है. केंद्र के पास इसका कोई जस्टिफिकेशन नहीं है कि इतने वक्त तक लोकपाल व लोकायुक्त की नियुक्ति को सस्पेंशन में क्यों रखा गया है. गौरतलब है कि 28 मार्च को इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई की और उक्त फैसला सुनाया.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि लोकपाल की नियुक्ति में देरी की कोई वजह नहीं है. लोकपाल एक्ट आज जिस रूप में है, वह अपने आप में सक्षम है और नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार के किसी संशोधन के इंतजार की जरूरत नहीं है. लोकपाल की नियुक्ति को लेकर दायर तमाम याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के जज रंजन गोगोई और नवीन सिन्हा की बेंच ने यह फैसला सुनाया. हालांकि केंद्र सरकार की ओर से एजी मुकुल रोहतगी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस पर सफाई दी.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लोकपाल की नियुक्ति वर्तमान हालात में संभव नहीं है. एक्ट में कई सारे संशोधन होने हैं, जो संसद में लंबित हैं. मल्लिकार्जुन खडगे नेता विपक्ष नहीं हैं. कांग्रेस ने नेता विपक्ष का दर्जा मांगा था, लेकिन स्पीकर ने उसे खारिज कर दिया है. इससे पहले भी ऐसा हुआ है जब संसद में नेता विपक्ष न हो. इस संबंध में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को शामिल करने संबंधी संशोधन मॉनसून सत्र में पास होने की उम्मीद है.

गौरतलब है कि लोकपाल की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर 7 जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं. इसमें कोर्ट से मांग की गयी थी कि वो सरकार को जल्द से जल्द लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश दें. इससे पहले 28 मार्च को करीब दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता कॉमन काउज की तरफ से वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार जान-बूझकर कर लोकपाल की नियुक्ति में देरी कर रही है.

तब केंद्र सरकार ने कहा था कि लोकपाल और लोकायुक्त कानून, 2013 के अनुसार लोकपाल की नियुक्ति के लिए नेता विपक्ष का होना जरूरी है और अभी लोकसभा में कोई नेता विपक्ष ही नहीं है.

मालूम हो कि लोकपाल की चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, विपक्ष केनेता, भारत के प्रधान न्यायाधीश या नामित सुप्रीम कोर्ट के जज और एक नामचीन हस्ती के होने का प्रावधान है.