नहीं माने शकील अहमद, आज मधुबनी सीट से भरेंगे पर्चा, मुश्किल हो जाएगी बद्री पूर्वे को

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्कः बिहार की मधुबनी लोकसभा सीट अब महागठबंधन के लिए सिर दर्द बनती जा रही है. मामला सलट नहीं रहा है. बगावत फूल स्पीड से है. कांग्रेस के सीनियर नेता हैं. नाम है शकील अहमद. नहीं मान रहे हैं. इस्तीफा भी दे दिया है राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से. आज 16 अप्रैल को नामांकन करने जा रहे हैं. वो भी निर्दलीय. ऐसे में बहुत मुश्किल होने वाली है मधुबनी लोकसभा सीट पर महागठबंधन को.

शकील अहमद ने साफ साफ कह दिया है कि अगर उनके अलावा कोई और मधुबनी से चुनाव लड़ेगा तो हार जाएगा. कांग्रेस के नेताओं का भी मानना है कि उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए. शकील अहमद ने अपने मधुबनी आवास पर मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने पार्टी के सामने समर्थन के लिए गुहार लगाई है. 18 अप्रैल तक का समय भी दे दिया. लेकिन अचानक हालात बदल गए और उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हालात बिगड़ गए हैं.

आपको बता दें कि मधुबनी की लोक सभा सीट महागठबंधन से वीआईपी के खाते में गई है. जब ये फैसला हुआ था तभी से शकील अहमद का विरोध दिखने लगा था. कयास लगाए जाने लगे थे कि वो कुछ करेंगे जरूर. हुआ भी ऐसा ही. अब वो आज मधुबनी सीट से निर्दलीय पर्चा भरने जा रहे हैं. उधर वीआईपी से कैंडिडेट बद्री पूर्वे मैदान में हैं. उनकी स्थिति खराब हो सकती है. शकील अहमद के इस फैसले से. वोट बंट जाएंगे. महागठबंधन के. फायदा भाजपा के अशोक कुमार यादव को मिल जाएगा.

इससे पहले राजद का टिकट नहीं मिलने से नाराज पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी मधुबनी लोकसभा सीट से महागठबंधन उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं. शकील अहमद 1998 और 2004 में मधुबनी सीट से लोकसभा सदस्य रहे थे. वे 1985, 1990 और 2000 में विधायक चुने गए थे.

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