लालू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, चारा घोटाला में चलेगा आपराधिक मुकदमा

लाइव सिटीज डेस्क : चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. झारखंड हाई कोर्ट द्वारा षड्यंत्र का चार्ज हटा लिए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. अब लालू प्रसाद के खिलाफ आपराधिक केस चलेगा. इसके लिए कोर्ट ने निर्देश दिया कि लालू प्रसाद पर सेपरेट केस चलाया जाए. सीबीआई की चुनौती को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया.   

बता दें कि झारखंड हाई कोर्ट ने चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद पर से आपराधिक (षड्यंत्र का चार्ज) धारा को हटा दिया था. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि लालू के खिलाफ आईपीसी की धारा 201 और धारा 511 के तहत मामला चलेगा, लेकिन षडयंत्र का चार्ज रद्द कर दिया था. लेकिन सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी.

सुप्रीम कोर्ट में देश के मशहूर वकील राम जेठ मलानी लालू प्रसाद का पक्ष रख रहे हैं. मालूम हो कि लालू-प्रसाद को चारा घोटाला मामले में 5 साल की सजा मिली हुई है. वो फ़िलहाल बेल पर बाहर चल रहे हैं. उन पर चाईबासा ट्रेजरी से 37 करोड़ रुपये गबन करने का दोषी पाया गया था.

मालूम हो कि  सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल को सुनवाई पूरी कर ली थी और सभी पक्षों से उनका पक्ष एक सप्ताह के भीतर रखने को कहा था. चारा घोटाला में लालू यादव पर 6 अलग-अलग मामले लंबित हैं और इनमें से एक में उन्हें 5 साल की सजा हो चुकी है. 

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान लालू की तरफ से राम जेठमलानी ने कहा था कि सभी मामलों में आरोप एक जैसे हैं इसलिए मामले को लेकर दर्ज किए गए अलग अलग केसों को सुनने की जरूरत नहीं है. यह पूरा मामला करीब फर्जी तरीके से पशु पालन विभाग से 1000 करोड़ रुपये निकालने से जुड़ा है. उस दौरान लालू प्रसाद बिहार के सीएम थे.

चारा घोटाले का खुलासा साल 1996 में सामने आया था. मामला बिहार पशुपालन विभाग में से करोड़ों रुपये के घोटाले से जुड़़ा है. उस वक्त लालू प्रसाद राज्य के सीएम थे. मामले में 90 के दशक की शुरूआत में बिहार के चाइबासा सरकारी खजाने से फर्जी बिल लगाकर 37.7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है. चारा घोटाले में कुल 950 करोड़ रुपये के गबन किए जाने का आरोप है. ‘चारा घोटाला’ मामले में कुल 56 आरोपियों के नाम शामिल हैं, जिनमें राजनेता, अफसर और चारा सप्लायर तक जुड़े हुए हैं. आपको बता दें कि इस घोटाले से जुड़े 7 आरोपियों की मौत हो चुकी है जबकि 2 सरकारी गवाह बन चुके हैं तथा 1 ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और एक आरोपी को कोर्ट से बरी किया जा चुका है.

घोटाले के आरोपियों में बिहार के दो पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र और लालूप्रसाद यादव सहित विद्यासागर निषाद, आर के राना, घ्रुव भगत, आईएए अफसर महेश प्रसाद और बेक जूलियस आदि नाम शामिल हैं। इसके अलावा कोर्ट ने मामले में लालू यादव को दोषी घोषित किया है. इसके लिए उनकी लोकसभा की सदस्यता छीन ली गयी और उन पर 11 साल तक कोई चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है. मामले में सीबीआई जांच में लालू का नाम आने पर उन्होंने राज्य के सीएम पद से त्यागपत्र दे दिया था. बता दें कि घोटाले से जड़े 53 मामलों में से 44 पर स्पेशल कोर्ट फैसला दे चुकी है. इसमें 5 मामलों में लालू यादव आरोपी हैं.

सीबीआई ने 5 अप्रैल 2000 को सभी के खिलाफ आरोप तय किए थे.