अविभाजित बिहार के पहले आदिवासी मंत्री सामु चरण नहीं रहे, पटना कॉलेज में की थी पढ़ाई

लाइव सिटीज, झारखंड डेस्क : अविभाजित बिहार के पहले आदिवासी समाज से बननेवाले मंत्री सामु चरण तुविड़ नहीं रहे. वे केवल मंत्री ही नहीं रहे, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी के साथ ही बटुकेश्वर दत्त के परम सहयोगी भी रहे थे. इतना ही नहीं, भूदान आंदोलन में विनोबा भावे के साथ भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. गुरुवार को सामु चरण तुविड़ का रांची में निधन हो गया. 98 वर्षीय सामु चरण ने रांची के मेडिका अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनका पार्थिव शरीर चाईबासा ले जाया गया है. चाईबासा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा.

अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकते हुए सामु चरण पटना से पैदल ही रांची आ गये थे. भारत की स्वाधीनता के बाद वह अस्वस्थ रहने लगे, लेकिन हर वर्ष 15 अगस्त को झंडा फहराना नहीं भूलते थे. उनके पुत्र जेबी तुविड़ और पुत्रवधू राजबाला वर्मा दोनों झारखंड के मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए. जेबी तुविड़ झारखंड में भाजपा के प्रवक्ता हैं.

गौरतलब है कि स्वतंत्रता सेनानी सामु चरण 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में काफी सक्रिय रहे. तब वे पटना कॉलेज में पढ़ते थे. ब्रिटिश सरकार को चकमा देते हुए उन्होंने पटना से रांची तक की पदयात्रा की और गांव-गांव में जाकर लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए जगाया. इसकी वजह से वह तीन महीने तक कॉलेज नहीं जा सके.

ब्रिटिश संसद में बम फेंकने वाले बटुकेश्वर दत्त के वे निकट सहयोगी रहे. महात्मा गांधी के आह्वान पर विदेशी कपड़ों की होली जलायी. अंग्रेजी सरकार में टेक्सटाइल इंस्पेक्टर की सरकारी नौकरी छोड़कर आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

1947 में वे चाईबासा डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के पहले अध्यक्ष बने. वर्ष 1954 में बिहार विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए और वर्ष 1961 में बिहार सरकार में जनजातीय समुदाय से पहले मंत्री बनाये गये. तब उन्हें वन व पंचायतीराज मंत्री बनाया गया था. वे दक्षिण बिहार (झारखंड) क्षेत्र के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें मंत्री बनाया गया. उनके निधन से राजनेताओं से लेकर बुद्धिजीवियों तक में शोक की लहर है.

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