जोगिंदर सिंह जिंदा होते तो जगन्नाथ मिश्रा की रिहाई पर उनका माथा फट गया होता

लाइव सिटीज डेस्क : चारा घोटाला मामले में 23 दिसंबर को बड़ा फैसला आया था. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को दोषी करार दिया गया तो दूसरी तरफ इसी केस में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया. जिसके बाद बिहार की सियासत गरमा गई. राजनीति जातिगत होने लगी. राजद नेताओं ने इसे बीजेपी का खेल बताया. राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि एक ही मामले में जगन्नाथ मिश्रा को बेल और लालू प्रसाद को जेल दे दिया गया. यह पीएम मोदी का खेल है. कई आवाजें उठी कि यह सवर्ण और पिछड़ा के बीच की लड़ाई है. जिसमें लालू प्रसाद हार गए. इन सब चर्चाओं के बीच यह भी कहा जाने लगा कि क्या जगन्नाथ मिश्रा चारा घोटाला में पाक साफ थे ? क्या उनकी कोई भूमिका नहीं थी ? इसका जवाब इस घोटाले की जाँच कर चुके पूर्व सीबीआई डायरेक्टर जोगिंदर सिंह जो अब इस दुनिया में नहीं हैं उनकी किताब INSIDE CBI में है.

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इस किताब में उन्होंने चारा घोटाला मामले में जगन्नाथ मिश्रा की भूमिका पर जो लिखा है. उससे कई तरह के गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं. कहा जा रहा है कि अगर इस फैसले के समय वह जीवित होते तो उन्हें जरूर आश्चर्य होता.  उन्होंने अपनी किताब में सभी तथ्यों के साथ यह लिखा है कि चारा घोटाला में जगन्नाथ मिश्रा की भूमिका बड़ी थी. उन्होंने लिखा है कि चारा घोटाला का पैसा जगन्नाथ मिश्रा को भी दिया गया था. AHD  में बड़े ओहदे के अधिकारी डॉ एसबी सिन्हा जिन्हें जगन्नाथ मिश्रा और लालू प्रसाद का संरक्षण प्राप्त था, उनके द्वारा ही कई मौके पर जगन्नाथ मिश्रा को लाखों रुपये दिए गए.



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चारा घोटाला में जगन्नाथ मिश्रा को भी मिला था पैसा

किताब में इस बात की भी चर्चा है कि डॉ जगन्नाथ मिश्रा को दिल्ली बेस्ड सप्लायर एमएस बेदी के हाथों जनवरी 1995 में भी 50 लाख रुपये मिले. वहीं फरवरी 1977 में भी एक बिचौलिए गणेश दुबे के मार्फ़त डॉ श्याम बिहार सिन्हा ने 25 लाख रुपये भिजवाये. यह भी जिक्र है कि टेलीफोन बिहार सर्किल के चीफ जनरल मैनेजर से  रिक्वेस्ट कर जगन्नाथ मिश्रा ने इस घोटाले के किंगपिंग डॉ श्याम बिहारी सिन्हा की बेटी सुधा सिन्हा के यहां टेलीफोन कनेक्शन भी लगवा दिया था.

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लालू प्रसाद के साथ हमेशा रही मिलीभगत

सीबीआई डायरेक्टर जोगिंदर सिंह ने किताब में स्पष्ट लिखा है कि जब जगन्नाथ मिश्रा मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने लालू प्रसाद के कहने पर चारा घोटाला में शामिल अधिकारियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया था. वैसे ही जब लालू प्रसाद मुख्यमंत्री बने तो जगन्नाथ मिश्रा (तब के विपक्ष के नेता) ने भी चारा घोटाला में शामिल अधिकारियों को संरक्षण देने की वकालत की थी.  इस किताब में यह भी स्पष्ट लिखा गया है कि जगन्नाथ मिश्रा ने ही तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को रिक्वेस्ट किया था कि इस घोटाले के किंगपिंग डॉ श्याम बिहारी सिन्हा के कार्यकाल को एक साल बढ़ा दिया जाए.

लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्रा (फाइल फोटो)

इस तरह की गई थी घोटाले के लीपापोती की कोशिश
अपनी किताब में आगे जोगिंदर सिंह लिखते हैं कि AHD1985- 86 और 1988-89 में घोटाले की पूरी साजिश क्षेत्रीय निदेशक के ऑफिस   AHD रांची में रची गई थी. इस बात की जानकारी रीजनल डेवलपमेंट कमिश्नर एमसी सुबर्णा को को मिली. जोगिंदर सिंह ने लिखा है कि 5 अप्रैल 1990 को इस लेटर में लिखा गया है कि  किस फर्जी तरीके से पैसे की निकासी की गई थी. इसमें दिखाया गया कि कई ट्रकों में चारे का ट्रांसपोर्ट किया गया था. लेकिन रजिस्टर पर जिस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज था. वह कार, मोटरसाइकिल, स्कूटर के रजिस्ट्रेशन नंबर थे. जिस पर AHD पटना के अधिकारी राम राज राम ने सफाई दी कि यह बस एक मिस्टेक से ज्यादा कुछ और नहीं है. इस मामले में तब के पशुपालन मंत्री राम जीवन सिंह ने मुख्यमंत्री लालू प्रसाद से चारा घोटाले में सीबीआई इन्क्वायरी की मांग की थी. जिस पर फोकस करते हुए लालू प्रसाद ने निगरानी विभाग से जांच कराने का आर्डर दिया. या आदेश 15 सितम्बर 1990 को दिया गया था.  चारा घोटाला दो मिनट में भाईचारा घोटाला बन जाता अगर लालू प्रसाद का DNA बदल जाता

CBI के पूर्व डायरेक्टर लेट जोगिंदर सिंह (फाइल फोटो)

डॉ राम राज राम को डायरेक्टर बनाये रखने के लिए खूब हुआ था खेल

जोगिंदर सिंह कहते हैं कि इन सारे वाकये से यह सपष्ट हो जाता है कि इस घोटाले का पूरा जाल लालू प्रसाद, जगन्नाथ मिश्रा और डॉ राम राज राम के बीच बुना गया था. जगन्नाथ मिश्र के बारे में जोगिंदर सिंह ने लिखा है  कि मिश्रा ने ही दबाव डाल कर डॉ राम राज राम को AHD  डॉ राधे श्याम सिंह से सीनियर बताते हुए उन्हें एडिशनल डायरेक्टर बनाये रखने को कहा. बाद में 23 सितम्बर 1988 को लालू प्रसाद ने इस मामले में पर्दाफाश  हो जाने की आशंका को देखते हुए एक खत तत्कालीन सीएम जगन्नाथ मिश्रा को लिखा कि वे डॉ राम राज राम को AHD का डायरेक्टर बना दें ताकि वह लालू प्रसाद के काफी करीब रह सकें. जोगिंदर सिंह  की किताब में चारा घोटाला में जगन्नाथ मिश्रा की जो भूमिका बतायी गई है. उसके अनुसार 23 दिसंबर को दिया गया फैसला जरूर कई मायने में सवाल खड़ा कर रहा है.

Note- यह बातें पूर्व सीबीआई डायरेक्टर जोगिंदर सिंह की किताब INSIDE CBI के पेज नंबर 77-79 के बीच में लिखी गई है.