काम पर तुरंत लौटे पटना नगर निगम के हड़ताली कर्मचारी, पटना हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : पटना नगर निगम के हड़ताली कर्मचारियों को पटना हाईकोर्ट ने तुरंत काम पर लौटने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कर्मचारियों की हड़ताल पर स्वत: संज्ञान लेते हुए तत्काल हड़ताल को खत्म करने का आदेश दिया है.

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए सभी हड़ताल कर्मचारियों को तुरंत ड्यूटी पर तैनात होने का निर्देश दिया है. मामले पर अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी.



बता दें कि नगर निगम की ओर से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने राजधानी की तस्वीर बिगाड़ दी है. जगह जगह गंदगी से लोगों को परेशानी हो रही है. ऐसे में निगम के क्षेत्र में अफरा तफरी का माहौल बन गया. निगम के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शनों का दौर चलता रहा. उस बीच कोर्ट में सुनवाई के लिए निगम के प्रतिनिध पहुंचे. 

पटना नगर निगम संयुक्त कर्मचारी समन्वय समिति की ओर से हड़ताल बुलाया गया है. समिति की माने तो 8 फरवरी 2020 को निगम के स्तर पर हुए समझौते का कार्यान्वयन अब तक नहीं किया गया.  कर्मियों की माने तो दैनिक मजदूरों को हटाने, कर्मियों की मांगों के प्रति निगम प्रशासन की उपेक्षापूर्ण रवैये, आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा सफाई में लगे कर्मियों का दोहन व निगम खजाने की लूट. इन मामलों को लेकर निगम के 8000 कर्मियों में भारी रोष एवं असंतोष व्याप्त है. ऐसी स्थिति में 10 सितंबर 2020 से इन सभी कर्मियों का हड़ताल जारी है.

कर्मियों की माने तो कोरोना एवं लॉकडाउन के दौरान निगम कर्मियों ने अपने जीवन की परवाह किए बिना. शहर की सफाई, पेयजल सप्लाई के अतिरिक्त जल जमाव आदि में पूरी मुस्तैदी से काम किया है. फिर भी इन्हें समय पर वेतन का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है.

इनके नेताओं ने यह भी कहा कि 26 अगस्त को ही नगर आयुक्त को 18 सूत्री मांग पत्र समर्पित करते हुए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि मांगों की पूर्ति नहीं होने पर 10 सितंबर से नगर निगम के सभी 8000 कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे. अभी तक नगर विकास एवं निगम के स्तर पर हुई वार्ता से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है.

निगम कर्मियों की प्रमुख मांगों में दैनिक मजदूरों का नियमितीकरण, दैनिक मजदूरों का न्यूनतम वेतन 600 एवं 700, निगम के प्रभारी कर्मियों का उसी पद पर समायोजन, आउटसोर्स कंपनियों के माध्यम से हो रहे निगम खजाने की लूट बंद हो. आउटसोर्स कर्मियों को श्रम कानूनों के अंतर्गत सभी सुविधाएं मुहैया हो अनुकंपा पर बहाली शीघ्र प्रारंभ हो. सेवानिवृत्ति के समय ही संपूर्ण पावना का भुगतान हो.  निगम कर्मियों के पूर्व से चले आ रहे संपूर्ण बकाए का भुगतान करें. दैनिक मजदूरों के भविष्य निधि का अद्यतन हिसाब किया जाए. ईएसआई की सुविधा अविलंब प्रारंभ हो. दैनिक मजदूरों की वरीयता सूची अविलंब प्रकाशित करें एवं संक्रमण से संबंधित प्रोत्साहन राशि कम से कम 10000 सभी निगम कर्मियों को भुगतान किया जाए आदि है.