सुशील मोदी का राज्यसभा के लिए चुना जाना तय, नामांकन का समय खत्म, विरोध में किसी ने नहीं भरा पर्चा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क :  बिहार से राज्यसभा के लिए सुशील कुमार मोदी निर्विरोध चुन लिए जाएंगे. नामांकन के आखिरी दिन किसी ने उनके खिलाफ पर्चा दाखिल नहीं किया. ऐसे में सुशील मोदी का चुना जाना तय हो गया. अब नाम वापसी के अंतिम दिन यानी 7 दिसंबर को निर्विरोध चुने जाने के घोषणा की सिर्फ औपचारिकता रह गयी.

रामविलास पासवान की मृत्यु से राज्यसभा के लिए बिहार से एक सीट खाली हो गया था. जिसको लेकर एनडीए की ओर से सुशील कुमार मोदी को उम्मीदवार बनाया गया था. महागठबंधन की ओर से भी प्रत्याशी खड़ा करने की बात कही जा रही थी. सूत्रों की माने तो इसके लिए महागठबंधन में काफी मथापच्ची भी हुआ. लेकिन नतीजा सिफर निकला.



राजनीतिक पंडितों की माने तो महागठबंधन एक तीर से दो निशाना लगाने के फिराक में था. आरजेडी की ओर से दिवंगत रामविलास पासवान की पत्नी रीना पासवान को प्रत्याशी बनाए जाने के लिए चिराग पासवान को राजी करने की कोशिश की गयी. लेकिन चिराग ने महागठबंधन की मंशा भांप लिया और महागठबंधन के प्रस्ताव को सिरे खारिज कर दिया.

इसके बाद दो और चेहरे पर विचार हो रहा था. पहला नाम अब्दुलबारी सिद्दकी का था जो एक मुस्लिम चेहरा और कद्दावर नेता है. केवटी से 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव हार गए हैं. इन्हें राज्यसभा भेजने पर विचार किया जा रहा था. आरजेडी सिद्दकी को राज्यसभा भेजकर अल्पसंख्यकों में एक संदेश देना चाहता था. लेकिन किसी कारणवश इस नाम पर सहमति नहीं बनी.

दूसरा चेहरा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह का बताया जा रहा था. जगदानंद सिंह लालू के करीबी भी है और पार्टी के वफादार नेताओं में एक है. ऐसे में आरजेडी में इनके नाम पर भी विचार हुआ. इनको राज्यसभा भेजकर पार्टी सवर्ण जाति को खुश करने के फिराक में थी. लेकिन किसी कारणवश इस नाम को आगे नहीं किया गया.