सरकार के दमन से नहीं डरने वाले शिक्षक, अप्रशिक्षित शिक्षकों की बर्खास्तगी पर सरकार को लिया आड़े हाथ

लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क: ​अप्रशिक्षित शिक्षकों की बर्खास्तगी का मामला तूल पकड़ने लगा है. अब इस पर तीखी प्रतिक्रियायें आने लगी हैं. इस कार्रवाई का टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट ने तीखा विरोध किया है. गोपगुट ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा की विगत विधानसभा चुनाव में शिक्षक-कर्मचारियों के एनडीए विरोधी मतदान करने पर सरकार आरटीई के बहाने बदले की कार्रवाई कर रही है.

संघ के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक एवं प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पाण्डेय न कहा कि अगर आरटीई इतना ही बाध्यकारी है तो फिर बिहार में ढाई लाख से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त जिम्मेवार व्यक्तियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही.



आरटीआई के प्रावधानों के आलोक में इन सभी रिक्तियों को 31 मार्च 2015 तक ही भर लिया जाना था. उन्होंने कहा कि चाहे बहाली की बात हो टीईटी शिक्षकों को पूर्ण वेतनमान की बात हो. कोई अन्य अधिकार की बात हो या समय से वेतन की बात हो. उस वक्त सरकार के लिए आरटीई समेत तमाम नियम कानून किसी काम के नहीं होते. लेकिन शिक्षकों पर जब कार्रवाई करनी होती है तो आरटीई को हथियार की तरह इस्तेमाल ​किया जाने लगता है.

वहीं संघ के राज्य सचिव अमित कुमार, सकिर इमाम,नाजिर हुसैन,संजीत पटेल,प्रदेश मीडिया प्रभारी राहुल विकास ने कहा कि बहाली के दस- दस वर्ष बाद तक प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था नही कर पाने के लिए सरकार जिम्मेवार है. 10 साल पर आने के बाद आज वह अचानक अप्रशिक्षित हो गए हैं हकीकत यह है कि जिन्हें अप्रशिक्षित कह कर निकाला जा रहा है कोई कहीं ना कहीं प्रशिक्षण ले चुके हैं बस उनका परीक्षा फल समय पर नहीं आया है जिसके लिए वह कहीं से भी जी मोबाइल नहीं है.

अतः उनके ऊपर कार्रवाई के बदले सहानुभूतिपूर्वक कदम उठाते हुए प्रशिक्षण पूरा करने के लिए एक और मौका देते हुए प्रशिक्षण पूर्ण करने की डेडलाइन को बढ़ाया जाए अन्यथा सरकार के इस भयादोहन की नीतियों के विरुद्ध न्याय के लिए न्यायालय से  सड़क तक सँघर्ष तेज होगा.