तेजप्रताप बताएं बिना नौकरी, बिजनेस के करोड़ों की संपत्ति के मालिक कैसे बनें – सुशील मोदी

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर तेजप्रताप पर हमला बोला है. उन्होंने पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव से पूछा है कि वे बताएं कि 2015 में पहली बार विधायक बनने से पहले ही वे करोड़ों की चल-अचल सम्पत्ति के मालिक कैसे बन गए थे. 29 लाख की बीएमडब्ल्यू कार और 15 लाख की अमेरिकन रेसिंग बाइक का शौक रखने वाले तेज प्रताप यादव की आय का स्रोत क्या था. क्या तेजप्रताप बिहार के युवकों को बिना नौकरी, बिजनेस किए सम्पति अर्जित करने का टिप्स देंगे.

सुशील मोदी ने आगे कहा कि तेज प्रताप 26 भूखंडों व 2 मकानों के भी मालिक हैं. ये दोनों मकान इन्हें स्व. रघुनाथ झा और कांति सिंह द्वारा गोपालगंज एवं पटना में गिफ्ट किया गया है. इसके साथ ही पटना के दो मंजिला टिस्को गेस्ट हाउस को जिस फेयरग्रो होल्डिंग कम्पनी के माध्यम से खरीदा गया, उसके कई निदेशकों में एक यह भी हैं.



पूर्व विधान पार्षद मो. शमीम और राकेश रंजन तथा उनकी पत्नियों द्वारा वसीयत के जरिए इन्हें 4 प्लॉट मिला हुआ है. औरंगाबाद में 7 प्लॉट (54 डिसमिल जमीन) के मालिक हैं. डिप्टी सीएम ने कहा है कि तेज प्रताप यादव को बताना चाहिए कि राजनेताओं ने अपने मकान व प्लॉट उन्हें दान क्यों किया. आखिर ये सारी सम्पतियां उन्होंने कब और कैसे हासिल की. करोड़ों की सम्पति बनाने के लिए उनकी आय का वैध स्रोत क्या था.

क्या राजद चरवाहा विद्यालय में पढ़े या नन-मैट्रिक युवाओं को भी सरकारी नौकरी दे सकता है? यदि ऐसा संभव नहीं, तो शिक्षा को मजबूत करने के बजाय इसका मजाक क्यों बनाया गया? राजद को गरीबों की दो पीढ़ियों को नौकरी के लायक नहीं बनने देने के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए.

लालू-राबड़ी सरकार ने युवाओं को नौकरी दिलाने की नहीं, केवल गरीबों के वोट हथियाने का जाल बुनने की चिंता की. चरवाहा विद्यालय खोलवाना राजनीतिक स्टंट था, रोजगार देने वाली शिक्षा से उसका कोई वास्ता नहीं था.

राजद चुनाव बाद नौकरी से लेकर हर काम के पैसे लेने या जमीन लिखवाने के एजेंडे पर काम कर रहा है. बिहार में राजद वोट ठगने का केजरीवाल- फार्मूला अपना रहा है. जो आज पहली कैबिनेट में 10 लाख लोगों को नौकरी देने का झूठा वादा कर रहे हैं, वे पहली कैबिनेट में ही हत्या, गैंगरेप, अपहरण जैसे सैकड़ों संगीन मामलों में मुकदमें वापस लेकर अपराधियों का दुस्साहस बढ़ाने वाले हैं. बिहार में अपहरण-फिरौती उद्योग चलायेंगे, शाम ढलते बाजार में सन्नाटा फैल जाएगा, महिलाएँ घर से निकलने में डरेंगी और युवा पलायन करने लगेंगे.