बीजेपी नेताओं पर तेजस्वी ने कसा तंज, कहा- ये लोग कठपुतली है, जिनका काम सिर्फ पीएम के साथ फोटो खिंचवाना है…

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बीजेपी के जितने भी ओबीसी, पिछड़ा और अतिपिछड़ा और दलित मंत्री और विधायक और नेता है, वो कठपुतली है. जिनका काम सिर्फ पीएम के साथ फोटो खिंचवाना है. ये बाते नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कही है. जातिगत जनगणना के मुद्दे पर वो विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने नीट में ओबीसी को हिस्सा देकर कोई उपकार नहीं किया है. ओबीसी वालों ने लड़कर अपना हक लिया है. ये ऐतिहासिक तब होगा जब नीट में ओबीसी फैकल्टी के बैकलॉग को भरा जाए. इसके लिए प्रयास करना होगा.

उन्होंने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर कल दोपहर 1 बजे सीएम नीतीश से मुलाकात की बात करते हुए कहा कि हमलोग मुख्यमंत्री से विधानमंडल के विस्तारित भवन में कल मुलाकात करेंगे. जिसका समय मिल गया है. कल की मुलाकात में हमलोग सीएम के समक्ष दो प्रस्ताव रखेंगे. एक प्रस्ताव यह कि जब बिहार विधानसभा से जातीय जनगणना कराने को लेकर एक प्रस्ताव पास कराकर केन्द्र सरकार को भेजा गया तो अभी तक क्यों नहीं कराया गया. इसके लिए फिर से एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया जाए, जो पीएम मोदी से मुलाकात कर उन्हें बिहार की भावना से अवगत कराने का काम करेगा.

तेजस्वी ने कहा कि अगर यह संभव नहीं है तो दूसरा प्रस्ताव यह रखा जाएगा कि कर्नाटक के तर्ज पर बिहार सरकार ही क्यों ना अपने खर्चे पर जातिगत जनगणना कराने का काम करें. क्यों कि मुख्यमंत्री हरवक्त कहते हैं कि होना चाहिए, होना चाहिए लेकिन सिर्फ कह देने से नहीं होता तो करना पड़ेगा या करवाना पड़ेगा. जिस समय यह प्रस्ताव पास करवाया गया उस समय बीजेपी वाले भी सरकार में थे. फिर आज वो इस मुद्दे से क्यों मुंह मोड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जातिगत जनगणना चाहते हैं तो खुद अपने खर्चे पर जातिगत जनगणना कराएं. आखिर किस मुंह से हम लोग दिखाएंगे कि सर्वसम्मति से हम लोगों ने इस प्रस्ताव को विधानसभा से पास कराकर दिल्ली भेजा है. आखिर इस विधानसभा का महत्व क्या रह जाएगा. लालू जी ने जातीगत जनगणना के लिए सड़क पर उतरने का काम किया था. वो और बात है कि एनडीए की सरकार ने इस प्रस्ताव को पास कराकर दिल्ली भेजने का काम किया, इसके बावजूद भी दिल्ली की मोदी सरकार ने ऐसा कराने से इनकार कर दिया है.

उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना के बाद ही यह पता चलेगा कि वास्तव में किसकी कितनी हिस्सेदारी है. ऐसा करने से बजट बनाने में आसान होगा. जिसका जितना हक होगा उसे मिलेगा. जब गाय बकरी की गणना की जा सकती है तो जातिगत जनगणना क्यों नहीं ?.