‘यूं ही नहीं लालू की सजा को तेजस्वी साजिश बता रहे, सवाल तो है’

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लालू प्रसाद (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज डेस्क : चारा घोटाला में सजायफ्ता राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद अभी अस्वस्थ हैं. दिल्ली एम्स में अपना इलाज करवा रहे हैं. लालू प्रसाद को अभी तक चारा घोटाला के 4 मामलों में सजा हो चुकी हैं. दुमका कोषागार मामले में तो लालू प्रसाद को 7-7 साल की अलग-अलग सजा सुनाई गई है. एक इंडियन पिनल कोड के तहत तो दूसरी सजा प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट के तहत मिली है. जबकि 2 मामले में अभी सजा मिलनी बाकी है. लालू प्रसाद को मिली सजा पर उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत राजद के कई नेता इसे बीजेपी और जदयू की साजिश करार दे रहे हैं. इसी मुद्दे को लेकर अंग्रेजी अखबार टेलीग्राफ की एडिटर मानिनी चटर्जी ने एक संपादकीय लिखा है. जिसमें उन्होंने समझाने की कोशिश की है कि आम जनता लालू प्रसाद को इन सबके बावजूद हीरो क्यों मानती है. साथ ही सेल्क्टिव जस्टिस यानी टार्गेटेड जस्टिस का मुद्दा भी उन्होंने उठाया है.

मानिनी चटर्जी, एडिटर टेलीग्राफ

मानिनी चटर्जी ने इसमें कई पहलुओं को उठा कर लालू प्रसाद की सजा से तुलना करने की कोशिश की हैं. उन्होंने लिखा है कि तेजस्वी यादव इसे जदयू और बीजेपी की साजिश बता रहे हैं, तो कुछ देर के लिए इसे माना जा सकता है कि वे उनके परिवार से हैं तो वे बोलेंगे ही. लेकिन देश में भ्रष्टाचार के कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर अब तक हुई कार्रवाई भी सोचने पर मजबूर कर देती है. उन्होंने इस एडिटोरियल आर्टिकल में नीरव मोदी, विजय माल्या, अमित शाह, व्यापम घोटाला आदि का जिक्र किया है. और उसमें अब तक क्या हुआ और CBI ने क्या एक्शन लिए. इसे भी बताया है.

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तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष, बिहार

नीरव मोदी और विजय माल्या

मानिनी चटर्जी लिखती हैं कि नीरव मोदी और विजय माल्या हजारों करोड़ रुपये लेकर विदेश भाग खड़े हुए हैं. इसकी तुलना में लालू प्रसाद को जिस कोषागार मामले में सजा मिली है. उसमें 37.7 करोड़, 89 लाख, फिर से 37.62 करोड़, और फिर चौथे मामले में 3.76 करोड़ का मामला है. अगर दोनों की तुलना करें तो लालू प्रसाद का यह घोटाला काफी बौना सा दिखता है. मानिनी चटर्जी कहती है कि घोटाला चाहे जिस अमाउंट में भी किया गया हो वह घोटाला ही है. फैक्ट यह है कि एक जनप्रतिनिधि जिसके पास अथॉरिटी थी, उसने ही खजाना लूट लिया.

विजय माल्या और नीरव मोदी
विजय माल्या और नीरव मोदी

व्यापम घोटाला में क्या हुआ

टेलीग्राफ की संपादक मानिनी चटर्जी ने आगे व्यापम घोटाला और गुजरात में अमित शाह के गृह मंत्री रहते हुए एनकाउंटर का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि यहां भी सेलेक्टिव जस्टिस का एक उदहारण दिखता है. व्यापम जैसा बड़ा घोटाला जिसमें कई छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया. 50 लाख से 1 करोड़ तक घूस लेकर एडमिशन कराया गया. टैलेंटेड छात्रों के साथ धोखा किया गया. इस मामले में CBI ने चौंकाने वाले कदम उठाये. शिवराज सिंह चौहान को जहां क्लीन चिट मिल गया. वहीं चौहान सरकार में मंत्री रहे लक्ष्मीकांत शर्मा जो इस व्यापम केस में आरोपी रहे और 19 महीने जेल में भी रहे लेकिन अब जमानत पर बाहर आ गए हैं और बीजेपी ने फिर से उनका पार्टी में स्वागत किया है.

मध्यप्रदेश का व्यापम घोटाला
मध्यप्रदेश का व्यापम घोटाला

फर्जी एनकाउंटर मामले में अमित शाह

मानिनी चटर्जी ने कहा है कि जिस तरह से पॉलिटिकल पार्टी CBI को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती हैं. उससे निष्पक्ष जांच पर भी सवाल उठने लगते हैं. गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ तैयार की गई सीबीआई की चार्जशीट में फेक एनकाउंटर कर के शोहराबुद्दीन, कौसर बी, तुलसीराम प्रजापति की हत्या को लकर कई स्ट्रांग एविडेंस थे. लेकिन दिल्ली में जैसे ही पीएम मोदी प्राइम मिनिस्टर बने और अमित शाह बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट बने उस केस को स्पेशल कोर्ट से फेंक दिया गया. जिसके बाद सीबीआई ने दोबारा अपील करने की हिम्मत भी नहीं दिखाई.

अमित शाह, बीजेपी प्रेसिडेंट
अमित शाह, बीजेपी प्रेसिडेंट

सजा के बाद भी बरकरार है लालू प्रसाद का जनाधार

इसके बाद उन्होंने लिखा है कि लालू प्रसाद के राज को भले ही जंगल राज कहा गया लेकिन उस दौरान लालू प्रसाद ने दलितों और पिछड़ों को मजबूत किया था. बिहार में दंगे होने से भी बचाए थे. लालू प्रसाद ने ही बिहार में लाल कृष्ण आडवाणी को अरेस्ट किया था. इन सब से लालू प्रसाद चर्चे में आ गये थे. मानिनी चटर्जी ने आम जनता के मूड को समझते हुए लिखा है. सवाल जनता के मन में यह भी है कि आखिर 37.62 करोड़ के चाईबासा मामले में लालू प्रसाद को 5 साल की सजा मिली है लेकिन दुमका ट्रेज़री से 3.7 करोड़ के मामले में लालू प्रसाद को 14 साल की सजा क्यों ?

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद

साथ ही लालू प्रसाद की उम्र अब 70 पार हो चली है, और बीमारी से भी जूझ रहे हैं. फिर भी 6 मामले में से 4 मामले में उन्हें सजा दी गई है. और माना जा रहा है कि बांकी में भी उन्हें सजा मिलेगी ही. बावजूद इस सबके लालू प्रसाद का जनाधार अब भी उतना ही मजबूत है. जनता की नजर में वे अब  भी हीरो हैं. और लालू प्रसाद को मिल रही सजा को टार्गेटेड जस्टिस करार दे रहे हैं.

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