डॉ श्रीपति की प्रधानमंत्री के लिए की गई भविष्यवाणी हुई सत्य साबित…

डॉ श्रीपति त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य ने की थी भविष्यवाणी

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: ज्योतिषशास्त्र सूर्य शास्त्र है. सूर्य के समान ही शाश्वत अचल एवं अपने आप में सर्वोत्तम शास्त्र है. सूर्य स्वयं प्रकाशित ग्रह है. नौ ग्रहों में सूर्य नारायण को राजा माना गया है. सूर्य ज्योतिष में पिता, पुत्र, हृदय और सत्ता का कारक ग्रह है. इसीलिए विद्वानों ने ज्योतिष को मणि कहा है. 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ कौन होगा भारत का प्रधानमंत्री ? यह ज्वलंत मुद्दा था. डॉ श्रीपति त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य ने कौन बनेगा प्रधानमंत्री कार्यक्रम के तहत नरेंद्र मोदी की कुंडली के आधार पर उनकी जन्मपत्रिका बनाकर 324 से 400 के बीच पूर्ण बहुमत में मोदी के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी.

इस भविष्वाणी को 26 फरवरी 2019 की सत्यता से पुनः ज्योतिष प्रेमियों के मन मस्तिष्क में ज्योतिष शास्त्र के प्रति श्रद्धा बढ़ा है. साथ ही बहुचर्चित बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से कौन विजयी होगा? यह काफी चर्चित लोकसभा क्षेत्र रहा.

आपको बता दें कि कभी कांग्रेस का गढ़ रहे बेगूसराय सीट पर लोकसभा चुनाव 2014 में पहली बार दिवंगत सांसद भोला सिंह के रूप में कमल खिला था. बेगूसराय जिले में भाजपा के लिए भोला बाबू एक तरह से लकी चार्म भी रहे थे. वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी. अब उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का काम केंद्रीय मंत्री व वर्तमान में इस सीट से भाजपा के प्रत्याशी गिरिराज सिंह के कंधों पर होगी.

दोनों नेता में एक समान बात यह रही कि इससे पहले भोला सिंह 2009 में नवादा सीट पर दर्ज की थी।वहीं 2014 में एनडीए से जदयू के बाहर आने के बाद बीजेपी ने गिरिराज सिंह को नवादा से और भोला बाबू को बेगूसराय से टिकट दी थी.  दोनों नेता पार्टी की आकांक्षा पर खड़े उतरे और शानदार जीत दर्ज की.

बेगूसराय जिले में परिसीमन से पूर्व दो लोकसभा क्षेत्र थे. इनमें एक बेगूसराय व दूसरा बलिया था. 2009 में परिसीमन के बाद दोनों लोकसभा क्षेत्र को मिलाकर एक सिर्फ बेगूसराय बना दिया गया. परिसीमन से पहले एक दो मौके को छोड़ दें तो बेगूसराय सीट पर कांग्रेस और बलिया सीट पर वामपंथियों का कब्जा रहा है.

2019 का लोकसभा चुनाव 2014 से अलग होने का अनुमान है. पिछले चुनाव में केंद्र सरकार की विफलता और नरेंद्र मोदी की लहर ने सभी समीकरणों को ध्वस्त कर दिए थे. इस बार पांच वर्ष के शासन काल के खिलाफ असंतोष और मतों के ध्रुवीकरण को जो प्रत्याशी रोकने में सफल होगा, जीत उसकी ही होगी. यदि ऐसा नहीं होता है तो परिणाम अप्रत्याशित होंगे.

बेगूसराय में मुकाबला दिलचस्प था. इस सीट पर बीजेपी के हिन्दुत्ववादी चेहरा गिरिराज सिंह, सीपीआई से जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कन्हैया कुमार व राजद से डॉ. तनवीर हसन चुनावी मैदान में थे. इन तीन दलों के पास अपना-अपना आधार वोट था.

स्व. भोला सिंह का नाम कद्दावर नेताओं में रहा है.  वर्ष 2018 में उनके निधन से एक राजनीतिक शून्यता उत्पन्न हुई है. उनकी कमी की भरपाई कौन जनप्रतिनिधि के रूप में कर सकेंगे. यह आने वाला समय बताएगा. 2018 में सांसद के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई. ऐसे में पार्टी ने उन्हीं के कद के नेता गिरिराज सिंह को यहां से चुनाव लड़ाने का फैसला लिया था.

बेगूसराय में देश के प्रमुख नेता-अभिनेता पहुंचे, जैसे शबाना आजमी, डी राजा, सीताराम येचुरी, कविता कृष्णन, जिग्नेश, प्रकाश राज और भी कई-कई नाम. साथ ही जवाहर लाल यूनिवर्सिटी के छात्र भी प्रचार प्रसार में पहुंचे.

स्थानीय लोग कन्हैया के बारे में कहते थे कि लड़का बोलने वाला है, बात रखने वाला है, अच्छी बातें करता है, लेकिन इसकी ही जाति के लोग इसे वोट दें तब ना… ” इस प्रश्न के उत्तर में 3 मई 2019 की भविष्यवाणी भी शत-प्रतिशत सत्य हुई. यह श्री त्रिपाठी की विद्वता का ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन का पुष्ट प्रमाण है.

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