बाबूओं की चौखट पर माथा टेक-टेक कर थक चुका भागलपुर का यह दिव्यांग, लेकिन एक ट्राई साइकिल मयस्सर नहीं हुआ…

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : केन्द्र और राज्य सरकार जन कल्याण योजनाओं को अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने की बात करती है. मंत्री, नेतागण इन योजनाओं को सभी तक पहुंचाने के दावे भी करते हैं. लेकिन जिनके कंधों पर इन योजनाओं को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी है,शायद वहीं अपना कर्तव्य भूल गए हैं. ऐसे अधिकारी अपने हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं. इन हरकतों से जरूरतमंद दर-दर भटकने को मजबूर है. ऐसा ही एक मामला भागलपुर से सामने आया है.

भागलपुर का दिव्यांग निभाष रजक ट्राई साइकिल की फरियाद लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन वहां ट्राई साइकिल की चाहत में पहुंचे निभाष की सुनने वाला कोई नहीं था, घंटों इंतजार के बाद पत्रकारों की पहल पर जिलाधिकारी प्रणब कुमार निभाष से तो मिले लेकिन फिर से उसे आश्वासन की घुट्टी पिलाते हुए नया दिव्यांग प्रमाण पत्र लाने की बात कर चलता कर दिया.



दिव्यांग की मांग को अनसूना करने को प्रशासनिक उदासीनता कहें या फिर लाचार निभाष का नसीब. कई दिनों का चक्कर काटने के बाद भी उसे एक ट्राई साइकिल तक मयस्सर नहीं हो रहा है. जिस ट्राई साइकिल के लिए डीएम साहब फिर से प्रमाण पत्र की मांग कर रहे हैं, वहीं डीआरडीए परिसर में दर्जनों ट्राई साइकिल खुले आसमान के नीचे धूल फांक रहा है.

दिव्यांग निभाष डीआरडीए परिसर में सड़ रहे ट्राई साइकिल को बार बार निहारता रहा, लेकिन उससे अधिकारी प्रमाण पत्र मांगते रहे. अंत में वह उदास होकर भागलपुर से 25 किलोमीटर दूर अपने घर साइकिल पर बैठकर चला गया.

बता दें कि जिला प्रशासन की ओर से आज विश्व दिव्यांग दिवस पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और उनके सर्वांगीण विकास को लेकर बड़ी-बड़ी बातें भी की गई, वहीं फरियादी निभाष ने बताया कि एक ट्राई साइकिल के लिए वह 5 वर्षों से दर-दर और दफ्तर -दफ्तर भटक रहा है, मजबूर दिव्यांग उच्च शिक्षा प्राप्त है और अपने गांव बनियाचक  में शिक्षा का अलख जगाते हुए अपना और अपने पूरे परिवार का भरण पोषण करता है, अब देखना है इस दिव्यांग पर भागलपुर जिला प्रशासन की नजर एक कब तक इनायत होती है.