बिहार में इसबार सिर्फ यहीं नेता दे रहे दही-चूड़ा का भोज, बाकियों ने कर लिया किनारा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क:  कड़ाके की ठंड में सियासी रिश्तों में गर्माहट लाने का एक जरिया माना जाने वाला दही चूड़ा का भोज इस बार बिहार में नहीं होगा. कोरोना के कारण करीब तीन दशक बाद पहली बार इसका आयोजन नहीं किया जा रहा है. बिहार के एक नेता को छोड़ किसी भी सियासी दल या नेता की ओर से अभी तक दही-चूड़ा भोज का आयोजन करने का एलान तक नहीं किया गया है. जो कभी सियासी गलियारे में इसे ताकत का प्रदर्शन माना जाता था.

अभी तक सिर्फ और सिर्फ एक नेता की ओर से भोज का आयोजन करने की जानकारी मिली है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता व सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा का ‘कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए वह मीडिया को आमंत्रित करेंगे. जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ बाबू के भोज में चूंकि हजारों की संख्या में लोग आते है. इसलिए वहां नियमों का पालन मुश्किल है, लेकिन मेरा आयोजन छोटा होता है. करीब डेढ़-दो सौ लोग ही रहते हैं. इसलिए मैंने इसे स्थगित नहीं किया है’.



बिहार में दही-चूड़ा के दिन जैसे-जैसे नजदीक आते थे वैसे-वैसे ठंड के  इस मौसम में सियासी गर्मियां बढ़ जाती थी. तैयारियां काफी दिन पहले से होने लगता था. दही-चूड़ा भोज के लिए विख्यात लालू परिवार ने भी किनारा कर लिया है. जब से लालू यादव चारा घोटाला में जेल गए हैं तब से ही इस परिवार ने मुंह मोड़ लिया है. हालांकि बीच में एक बार लालू प्रसाद की रिहाई की खबर आने के बाद तैयारियां की गयी थी लेकिन निराश हाथ लगा. लालू जी को जमानत नहीं हुई और दही-चूड़ा का भोज स्थगित कर दिया गया.

उधर वशिष्ठ नारायण सिंह ने कोरोना का हवाला देते हुए भोज से किनारा कर लिया है. कभी सियासी गलियारे में इसे ताकत का प्रदर्शन माना जाता था. आज कोरोना के चलते इस बार का संयोग नहीं दिख रहा है. ‘दादा’ के भोज में कई राजनीतिक हस्तियां, समाजसेवी, पार्टी कार्यकर्ता आते थे. हजारों की संख्या में लोग दही-चूड़ा का आनंद उठाते थे लेकिन इसबार ऐसा संयोग नहीं दिखता है.