रेलवे स्टेशनों पर शौच करना होगा बेहद सस्ता और मुफ्त भी, ये है वजह

लाइव सिटीज डेस्क : रेलवे स्टेशनों पर ‘पे एंड यूज’ शौचालय भी इन दिनों काफी महंगा हो चला है. शौचालय के ठेकेदार बाजार दर पर कीमत तय कर करीब 2 से 20 रुपये तक वसूल करते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. जल्द ही रेलवे स्टेशनों पर शौचालय का इस्तेमाल बहुत सस्ता हो जाएगा. यहां तक कि छोटे स्टेशनों पर तो यह मुफ्त भी किया जा सकता है. इस बारे में बोर्ड ने 7 फरवरी को सभी जोनल रेलवे को एक पत्र भेजा है. माना जा रहा है कि करीब 30 दिनों के भीतर इस पर फैसला आ सकता है.

Pay and Use Toilet

बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को भेजे पत्र में कहा है, “डीआरएम को स्थान विशेष का आकलन कर यह फैसला लेने का अधिकार दिया गया है कि “पे एंड यूज” शौचालयों के निर्माण, संचालन और रखरखाव के काम को वे कमाई अनुबंध (अर्निंग कांट्रेक्ट) या सेवा अनुबंध (सर्विस कांट्रेक्ट) में से किस श्रेणी में रखना चाहते हैं.” सर्विस कांट्रेक्ट के तहत टॉयलेट का इस्तेमाल करने वालों से नाममात्र की राशि या फिर कुछ नहीं लिया जाएगा.

पे एंड यूज टॉयलेट

‘पे एंड यूज’ के वर्तमान दरों की यदि बात करें तो ठेकेदार ही अभी बाजार रेट के आधार पर सुविधा शुल्क की दर तय किया गया है. इस तरह के ज्यादातर शौचालयों में अभी मूत्र विसर्जन के लिए एक से दो रुपए और शौच व स्नान के वास्ते 15 से 20 रुपए सुविधा शुल्क के रूप में चार्ज किए जा रहे हैं. जबकि इस बारे में रेलवे के 2012 के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट निर्देश दिया गया है. उसके अनुसार, पे एंड यूज टॉयलेट में केवल शौच के लिए दो रुपए और शौच के साथ स्नान करने पर पांच रुपए की राशि वसूली जानी चाहिए. रेलवे ने मूत्र विसर्जन को मुफ्त की श्रेणी में रखा है. रेलवे में निकली है बंपर वैकेंसी, 62,907 पदों के लिए जल्दी करें अप्लाई 

इन गड़बड़ियों के मद्देनजर रेलवे बोर्ड की 2 फरवरी को हुई बैठक में इस नीति को बदलने का फैसला लिया गया. टॉयलेट इस्तेमाल की नई नीति के तहत मंडल रेलवे प्रबंधकों (डीआरएम) को इस बात का फैसला लेने के लिए अधिकृत किया गया है कि उनके अधिकार क्षेत्र में पड़ने वाले स्टेशनों के “पे एंड यूज” शौचालयों का इस्तेमाल करने वाले लोगों से सुविधा शुल्क लिया जाए या उसे मुफ्त कर दिया जाए.” गजब का विकास होगा बिहार में रेलवे का, इस बार बजट में मिला है 4407 करोड़ 

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, “पे एंड यूज” टॉयलेट पॉलिसी की समीक्षा इसलिए करनी पड़ी क्योंकि स्वच्छ भारत मिशन के तहत पर्याप्त मात्रा में शौचालय नहीं बन पाए और ग्रामीण क्षेत्रों के छोट स्टेशनों पर मौजूद इस तरह के टॉयलेट का इस्तेमाल लोग नहीं कर रहे हैं।” उनका कहना है, “इस तरह की रिपोर्ट है कि कई छोटे स्टेशनों पर लोग “पे एंड यूज” टॉयलेट का इस्तेमाल करने की बजाय खुले में शौच कर रहे हैं.”

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