श्रम मंत्री विजय कुमार सिन्हा के आश्वासन पर बिहार में ट्रक हड़ताल खत्म

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लाइव सिटीज डेस्क : बिहार में ट्रक हड़ताल से हो रही परेशानियों से लोगों को राहत मिल गई है. दरअसल, ट्रक एसोसिएशन ने हड़ताल समाप्त कर दिया है. राज्य में जारी ट्रक हड़ताल रविवार की देर रात समाप्त हो गयी. जिला अतिथिगृह, लखीसराय में श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा और बिहार ट्रक अॉनर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष भानुशेखर सिन्हा के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद भानुशेखर ने हड़ताल समाप्त होने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि श्रम मंत्री ने आश्वासन दिया कि वे कैबिनेट की बैठक में ट्रक अॉनर्स की समस्याअों को रखेंगे. इस भरोसे के बाद एक बार फिर ट्रकों का परिचालन शुरू हो गया है. नेशनल हाइवेज पर अब ट्रक की लंबी लाइन खत्म हो गई है.

बता दें कि बिहार सरकार की नई खनिज नियमावली, परमिट शुल्क, सेवा शुल्क तथा अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) शुल्क में हुई भारी बढ़ोतरी के विरोध में राज्य के एक लाख से अधिक ट्रक बीते कुछ दिनों से हड़ताल पर थे. यह हड़ताल बिहार राज्य मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन (बीएमटीएफ) के आह्वान पर की गई थी. बिहार राज्य मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन और अन्य जिला ट्रक एसोसिएशनों के आह्वान पर राज्य में निबंधित 1.30 लाख ट्रक और 50 हजार बड़े मालवाहक वाहनों का परिचालन पूरे तरीके से ठप रहा था.



बिहार मोटर्स ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद सिंह ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार की नियमावली के तहत मालवाहक वाहनों के दूसरे राज्यों से खनिज संपदा लाने पर रोक लगा दी गई है. बालू खनन पर भी रोक लगाने के बाद परिवहन उद्योग का धंधा पूरी तरीके से चौपट हो चुका है. सभी शुल्कों में भी वृद्धि कर दी गई है.

उन्होंने कहा कि “हमें ऑल इंडिया मोटर वाहन एसोसिएशन का समर्थन इस हड़ताल को प्राप्त है . अन्य राज्य संघों ने भी आश्वासन दिया था कि उनके वाहन भी बिहार में नहीं चलेंगे.” आगे उन्होंने कहा कि सरकार के सामने फेडरेशन लगातार अपनी मांग रखता रहा है, मगर सरकार ने उनकी मांगों को नहीं मान रही है. ऐसे में अनिश्चितकालीन हड़ताल के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है.

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि नई खनिज नियमावली के अलावा परमिट शुल्क, सेवा शुल्क तथा लाइसेंस शुल्क में हुई भारी बढ़ोतरी से भी ट्रांसपोर्टरों का धंधा चौपट हो गया है.

बता दें कि ट्रकों के हड़ताल ने बस, या अपनी गाड़ी से सफर करने वाले यात्रियों के नाक में दम कर दिया. अनिश्चितकालीन हड़ताल की वजह से छोटी से छोटी यात्रा भी सिर दर्द पैदा कर देने वाली रही. 3-  साढ़े 3 घंटे की सफर तय करने में बस को करीब 9 घंटे लग रहे थे. आलम यह है कि कई गाड़ियों के जाम में फंस जाने की वजह से कुछ बसों को भी कैंसिल कर दिया गया था.