हार्दिक पटेल को झटका, दो सहयोगियों ने थामा भाजपा का दामन

लाइव सिटीज डेस्क : गुजरात चुनाव को लेकर सियासत चरम पर है. इस बार गुजरात में हॉट टॉपिक कोई बना है तो वह है पटेल आरक्षण आंदोलन का नेता हार्दिक पटेल. हार्दिक को कांग्रेस ने अपनी पार्टी से  हाथ मिलाने का न्योता भी दिया है. लेकिन इस बीच कुछ ऐसा हुआ है जिससे हार्दिक पटेल और कांग्रेस दोनों को बड़ा झटका लगा है.

दरअसल, पीएम मोदी के गुजरात दौरे से एक रात पहले गुजरात में हार्दिक पटेल के महत्वपूर्ण सहयोगी वरुण पटेल और रेशमा पटेल सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए. गुजरात विधानसभा चुनाव से पूर्व हुआ यह घटनाक्रम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी के हार्दिक पटेल को उनकी पार्टी के साथ हाथ मिलाने का न्योता देने के कुछ घंटों बाद हुआ है.

वरुण और रेशमा पाटीदार आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे. भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने हार्दिक को कांग्रेस का एजेंट बताते हुए कहा कि वे आंदोलन के जरिये भाजपा सरकार को हटाना चाहते थे. वे मुख्यमंत्री विजय रूपानी, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जीतू वाघानी से संसदीय बोर्ड की बैठक के दौरान मुलाकात की. इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी हिस्सा लिया.

भाजपा में शामिल होने के बाद पाटीदार नेताओं ने संवाददाताओं से कहा कि हार्दिक ‘कांग्रेस का एजेंट’ बन गया है और मौजूदा राज्य सरकार को उखाड़ फेंकने के लिये आंदोलन का इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहा है. रेशमा पटेल ने कहा, ‘हमारा आंदोलन ओबीसी कोटा के तहत आरक्षण के बारे में था. यह भाजपा को उखाड़कर उसकी जगह कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिये नहीं था. हमारी लड़ाई समाज को न्याय दिलान की थी, ना कि कांग्रेस को जिताने की. भाजपा ने हमारी तीन मांगे मान ली थी.’

वहीं भाजपा का हाथ थामने वाले दूसरे पाटीदार नेता वरुण पटेल ने कहा, ‘हमने सरकार से और सीएम से अपनी मांगों को लेकर बात की है. उन्होंने हमारी मांगों को पूरा करने को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की है’