चाचा “पारस” की चिराग ने खोल दी पोल, कहा-उन्हें तो केन्द्रीय मंत्री बनना था, अब हमलोगों की क्या जरूरत है ?

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: चिराग पासवान ने चाचा “पारस” की पोल खोल कर रख दी. उन्होंने कहा कि वो मंत्री बन गए उन्हें अब और क्या चाहिए. अब उनको किसी की जरूरत नहीं है. दलितों के नाम पर राजनीति कर वो यहां तक पहुंच गए, लेकिन जब बिहार में दलित छात्रों का उत्पीड़न हो रहा है, तो उसपर वो खामोश हैं. उन्हें शर्म आनी चाहिए. चुनाव के समय में इन लोगों को दलितों वोट की याद आती है. उसके बाद ये लोग सत्ता के नशे में चूर हो जाते हैं.

दरअसल पटना में अम्बेडकर छात्रावास खाली कराने के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन में चिराग पासवान शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने केन्द्र और राज्य सरकार में शामिल दलित मंत्रियों पर खूब तंज कसा. उन्होंने कहा कि पशुपति पारस सीधे इस मुद्दे पर सीएम नीतीश से बात कर सकते हैं. लेकिन वो ऐसा नहीं करेंगे. वो अपने मकसद में कामयाब हो गए, मंत्री बन गए अब उन्हें किसी की फिक्र नहीं है.

चिराग पासवान ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीयत शुरू से ही दलित विरोधी रही है. महज दो से चार घंटे के काम के लिए अनुसूचित जाति-जनजाति के हॉस्टल को खाली करने का फरमान जारी करना कहां का न्याय है ?. उन्होंने आग्रह करते हुए कहा कि ऐसा करने से दलित के बच्चों को पढ़ने लिखने में काफी दिक्कत होगी.

उन्होंने केन्द्र और राज्य सरकार में दलित मंत्रियों और नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्रों पर अत्याचार इन नेताओं को नहीं दिख रहा है. वो लोग पूरी तरह से खामोश है. उनलोगों को इनकी याद सिर्फ चुनाव के समय ही आता है. अभी तो कोई चुनाव नहीं है ऐसे में दलित मंत्री या नेता क्यों इन छात्रों की समस्या में हस्ताक्षेप करेंगे.

चिराग ने कहा कि प्रत्येक साल अनुसूचित जाति-जनजाति के नाम पर करोड़ों रूपये की राशियां आवंटित की जाती है. लेकिन सारी की सारी राशियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है. राजनीतिक द्वेश से दलित छात्रावास को खाली कराया जा रहा है. मौजूदा सरकार में शामिल दलित मंत्रियों को शर्म आना चाहिए की वो लोग छात्रों की समस्या पर खामोश बने बैठे है.