बिहार के कोरोना वॉरियर की अनसुनी दास्तां… सुनकर रो पड़ेंगे आप

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : कोरोना संकट से आज हर कोई जूझ रहा है. कोई कम तो कोई ज्यादा. कोरोना संकट की पीड़ा झेल कई लोग गुमनाम गलियों में खो जा रहे हैं. इस संक्रमण काल में हजारों प्रवासी मजदूर साइकिल से बिहार लौटे, लेकिन सबकी किस्मत दरभंगा की ज्योति जैसी नहीं है.

बात 19 जून 2020 की है. बेगूसराय के ओंकारनाथ झा एमए पास थे, थे इसलिए कि अब वो इस दुनिया में नहीं हैं. दहिया निवासी ओंकारनाथ झा दिल्ली में कंपनी ग्रुप फोर एस में हेड गार्ड के पद पर तैनात थे.



अपने ड्यूटी पोस्ट पर 15 किलोमीटर दूर  साइकिल चलाकर चिलचिलाती धूप में खाली पेट पहुंचा. लॉकडाउन के कारण पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर प्रतिबंध था. गरीब थे, इसलिए साइकिल से ही आते ही जाते थे.

उस दिन वे ड्यूटी पर पहुंचते ही अचेत होकर गिर पड़े. उसी हालत में उसे सफदरगंज अस्पताल  लाया गया. वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. कंपनी से ओंकारनाथ झा के बड़े लड़के को फोन किया गया.

फोन पर कहा गया कि पिताजी बीमार हो गए हैं, सफदरगंज अस्पताल में भर्ती हैं. परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे. वहां किसी वार्ड में उनके पिता नहीं थे. अंत में पथिक वार्ड में लावारिस हालत में शव पड़ा मिला. तब कंपनी एडमिनिस्ट्रेशन ने 20 हजार रुपये देकर शव को परिजनों के साथ बेगूसराय के लिए रवाना कर दिया. इसके बाद कंपनी ने अपना पल्ला झाड़ लिया.

इसके बाद परिजनों पर गम का पहाड़ टूट गया. जब कमाने वाला ही नहीं रहा तो घर में खाना कहां से आएगा. घर-गृहस्थी की गाड़ी बेपटरी हो गई. परिवार की गुहार न दिल्ली सरकार सुन रही थी, न केंद्र सरकार और न ही बिहार सरकार. यह परिवार वोट बैंक भी नहीं था, जिसके लोग खादी वाले आगे आते. कंपनी तो पहले ही इतिश्री के रोल में आ गयी थी.

दिवंगत ओंकार की बेवा पत्नी पुष्पा देवी एवं पुत्र की चप्पलें घिस गईं, लेकिन किसी ने सुधि नहीं ली. आंखों के आगे घुप अंधेरा छा गया, कैसे घर की गाड़ी पटरी पर आएगी.

ऐसे में दिवंगत ओंकार के बड़े भाई युगल झा ने गूगल पर सर्च किया तो पता चला कि प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी की संस्था है कैप्सी, जो सुरक्षा गार्ड को हर तरह की मदद करते हैं. गार्डों को मरणोपरांत भी सुविधा दिलाने में मदद करते हैं. सर्च में ही पता चला कि उसी की ईकाई बिहार में भी काम कर रही है. तब युगल झा ने कैप्सी के बिहार अध्यक्ष डीपी सिंह से संपर्क किया.

ओंकार की बेवा पत्नी के आवेदन ने उन्हें रूला दिया. भले ही डीपी सिंह की ओंकार झा से मुलाकात नहीं हुई थी, लेकिन उन्होंने मदद करने की ठान ली. चूंकि मामला दिल्ली का था, इसलिए उन्होंने कैप्सी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर विक्रम सिंह से फोन पर बात की और पूरी घटना की जानकारी दी.

उन्होंने तुरंत ग्रुप फोर एस के एमडी राजीव शर्मा को मैसेज किया. बाद में डीपी सिंह ने भी कंपनी को डिटेल्स मेल किया. तब एमडी ने मानवता दिखाई. एचआर के निदेशक को निर्देश दिया. 24 घंटे के अंदर साढ़े चार लाख रुपये दिवंगत ओंकार की विधवा के खाते में भेजा गया. पीएफ की राशि और पेंशन के लिए भी डॉक्यूमेंट्स बढ़ा दिये गये हैं, जल्द ही वह भी मिल जाएगा. बीमा की राशि भी मिलेगी.