इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट परीक्षार्थियों का पूरे प्रदेश में हंगामा

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार इंटरमीडिएट काउंसिल द्वारा कल इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणाम आने के बाद पूरा प्रदेश में बौखलाहट देखने को मिल रही है. पटना में परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्र—छात्राओं ने बोर्ड आफिस के आसपास जमकर हंगामा किया और सरकार विरोधी नारे लगाए.

यहां आंदोलनकारी स्टूडेंट्स पर पुलिस ने लाठियां भी चटकायीं जिसमें कई बच्चों के जख्मी होने की खबर है. खराब परीक्षा परिणाम एवं बदहाल शिक्षा व्यवस्था के विरोध में पूरे प्रदेश से विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं. 

गोपालगंज, आरा, बक्सर, शिवहर सभी जगह से स्टूडेंट़स ने विरोध में शिक्षामंत्री एवं बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर का पुतला दहन किया. लोग बता रहे हैं कि परीक्षा परिधाम की स्थिति यह है कि जो लोग प्रथम श्रेणी से पास होने का दावा कर रहे थे, परिणाम आने पर वे भी फेल हैं.

कहीं हजारों परीक्षार्थियों ने प्रायोगिक परीक्षा का मार्क्स अंकपत्र में नहीं जोड़े जाने को लेकर हंगामा किया तो कहीं खराब अंक दिए जाने के आरोप बोर्ड पर लगाए. गोपालगंज जिले के बरौली प्रखंड के लड़ोली इंटर कॉलेज के हजारों छात्र प्रायोगिक परीक्षा का मार्क्स नहीं जोड़े जाने के कारण फेल हो गये बताए जाते हैं.

इस परीक्षा परिणाम से क्षुब्ध परीक्षार्थी सुबह—सुबह ही स्वत:स्फूर्त तरीके से उतर गये और एनएच 28 को बढ़या और सोनबरसा में जाम कर दिया. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद गोपालगंज इकाई के द्वारा शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी का पुतला दहन किया गया और नारा लगाकर उनसे इस्तीफे की मांग की.

छपरा जिला के सोनपुर में इंटरमीडिएट परीक्षा 2017 के घोषित परिणाम में गड़बड़ी के ख़िलाफ़ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सोनपुर इकाई ने बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया. अभाविप के नगरमंत्री विकास किशोर गौतम ‘विक्की’ के नेतृत्व में सैंकड़ों छात्र एवं कार्यकर्ता सोनपुर के रजिस्ट्री बाजार से बिहार सरकार का अर्थी जुलूस निकालकर गांधी चौक पर शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी का पुतला दहन किया.

अभाविप के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आशुतोष कुमार रितेश ने कहा है कि इंटरमीडिएट परीक्षा का यह परिणाम बिहार सरकार की शिक्षा नीति एवं शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है. बिहार सरकार ने तो छात्रों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ किया है कि जो छात्र IIT जैसे परीक्षा में उतीर्ण हो जाते हैं लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित परीक्षा में 2 और 3 नम्बर लाकर फेल हो जाते हैं.

इस जघन्य अपराध के लिए शिक्षा मंत्री को अविलम्ब इस्तीफा देना चाहिए और मुख्यमंत्री को छात्रों से माफी मांगते हुए योग्य शिक्षकों से पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था करनी चाहिए. 

सासाराम में भी गौरक्षिनी मुहल्ला से कोचिंग क्लास समाप्त होने पर इकट्ठा छात्रों ने इंटर रिजल्ट को लेकर सड़क जाम कर दिया और सरकार विरोधी नारे लगाए. जाम के दौरान छात्रों ने गुजर रहे वाहनों के साथ ठोक—ठाक भी की. इस संबंध में एक वरिष्ठ प्रोफ़ेसर ने बताया कि स्कूलों की शिक्षा से नाता तोड़ कोचिंग के नाम पर मस्ती करने वाले छात्रों को अगले साल आने वाले एग्जाम के नतीजों की अभी से डर सता रहा है. इसीलिए वे नकल की छूट के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार की शिक्षा और परीक्षा की नीति में व्यापक बदलाव आज की जरुरत बन गई है. 

जमुई में बिहार इंटरमीडिएट के परिणामों के खराब आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य विकास प्रसाद सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री में यदि तनिक भी नैतिकता बची है तो वह इस्तीफा दें. उन्होंने आगे कहा कि परीक्षा में सरकार की शिक्षा के प्रति उदासीनता स्पष्ट झलकती है, जिस तरह से आज इंटरमीडिएट के विज्ञान, कला एवं वाणिज्य संकाय के परीक्षा का परिणाम आया है,वो पूरे देश मे बिहार की शिक्षा की धज्जियां उड़ गईं.

6 लाख से अधिक विद्यार्थी का भविष्य सरकार के कुनीति के कारण एक साल पीछे चला गया. उन्होंने कहा कि शिक्षकों से पढ़ाई छोड़कर अन्य सरकारी काम लिया जाता है जिस कारण बच्चों का सिलेबस पूरा नही हो पाता है और यही कारण है कि  65 प्रतिशत से अधिक बच्चे परिणाम से वंचित रह गए. इसके वावजूद हमारे शिक्षा मंत्री अपनी वाहवाही लूट रहे है जबकि ये शिक्षा मंत्री की नाकामी है. 

बिहार के सीमावर्ती जिला शिवहर में भी इंटर के खराब रिजल्ट के विरोध में शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर का पुतला दहन किया गया. पुतला दहन से पहले शिवहर ट्रेनिंग स्कूल से लेकर समाहरणालय मैदान तक दोनों की अर्थी यात्रा निकाली गयी.

पुतला दहन में शामिल छात्र नारे लगाते हुए दुबारा कॉपी चेक करने की मांग कर रहे थे. छात्रों का आरोप था कि शिक्षा मंत्री की ढुलमुल शिक्षा नीति शिक्षा को ले डुबी है. स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं. जहां शिक्षक हैं वहां भी पढाई नहीं होती तो स्टूडेंट्स कैसे पास करेगें. यहां के शिक्षक हमेशा वेतन बढ़ाने की मांग पर हड़ताल पर ही रहते हैं.

समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय में रालोसपा महिला प्रकोष्ठ की राज्य उपाध्यक्ष स्वीटी प्रिया ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के घोषित परीक्षाफल पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा है कि परीक्षाफल देखने से स्पष्ट हो गया है कि राज्य में शैक्षणिक वातावरण समाप्त हो चुकी है.

उन्होंने शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की. महिला नेत्री ने कहा है कि राज्य में पठन-पाठन की स्थिति इससे बदतर आज तक नहीं देखी गई थी. इस बार के परीक्षाफल की दशा यह रही कि इंटर परीक्षा में 70 प्रतिशत परीक्षार्थी फेल हो गए हैं. वहीं 30 प्रतिशत परीक्षार्थी किसी तरह से परीक्षा पास कर पाए हैं. पास स्टूडेंट्स का राज्य एवं देश के किसी भी प्रतिष्ठित कॉलेजों में नामांकन नहीं हो पाएगा.

बक्सर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं ने इंटरमीडिएट की खराब परीक्षा पर बुधवार को बिहार के शिक्षा मंत्री का पुतला दहन किया. पुलिस चौकी के पास पुतला दहन करने के बाद वहीं एक सभा की गई जिसमें वक्ताओं ने कहा कि सरकार की ओर से शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में महज भवन बना दिया गया है़ लेकिन शिक्षक गायब हैं.

बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. बिहार सरकार ने हाई स्कूल तो बना दिया है लेकिन, कॉमर्स व साइंस के शिक्षक पर्याप्त नहीं है. कई स्कूलों में साइंस का प्रयोगशला तक नहीं है. पिछले वर्ष भी बच्चों के बेहतर परिणाम नहीं आए थे. बावजूद इसके सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया.

खगड़िया में अभाविप ने शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका और कॉपी के पुनर्मूल्यांकन की मांग की. अभाविप के कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारा लगाते हुए शहर के राजेंद्र चौक पर पहुंचे. जहां एक सभा का भी आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता परिषद के नगर मंत्री ने किया. मौके पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 12वीं के खराब रिजल्ट के लिए बिहार की सरकार जिम्मेदार है क्योंकि इंटर परीक्षा की काॅपी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के द्वारा जांच कराई गई है जिसपर हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया था.

बावजूद इसके शिक्षा मंत्री ने प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों से काॅपी की जांच करवा कर छात्रों के रिजल्ट का बुरा हाल कर दिया है. परिषद के सह मंत्री राजीव गुप्ता तथा कृष्णकांत पोद्दार ने कहा कि बिहार के शिक्षा व्यवस्था को गर्त में ले जाना भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चयों में से एक प्रतीत होता है क्योंकि किसी भी बोर्ड की परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थी फेल नहीं हो सकते हैं. 

बेगूसराय में भी बिहार इंटरमीडिएट के रिजल्ट में भारी गड़बड़ी व जानबूझकर छात्रों को फेल करने का आरोप लगाते हुए बुधवार को अभाविप ने जीडी कॉलेज, बेगूसराय में शिक्षा मंत्री का अर्थी जुलूस निकाला और कॉलेज के गेट पर पुतला दहन किया. मौके पर अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की गई. बिहार सरकार जवाब दो, छात्रों के खराब रिजल्ट का हिसाब दो. छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बंद करो, छात्र विरोधी शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो, शिक्षा का हाल है बेहाल जवाब दो बिहार सरकार आदि नारे लगाए गए.

कार्यक्रम का नेतृत्व जीडी कॉलेज के अध्यक्ष रामप्रकाश कुमार एवं नगर सह मंत्री आजाद कुमार ने किया. इस अवसर जिला संयोजक अरुण कुमार एवं नगर सह मंत्री सोनू कुमार ने कहा कि सरकार बिहार के छात्रों के साथ अन्याय कर रही है. जिस तरह8 लाख छात्रों को इंटर में फेल किया गया है, इससे साफ जाहिर होता है कि शिक्षा मंत्री छात्र विरोधी हैं. जिस तरह इंटर की कांपी की जांच प्राथमिक शिक्षकों से कराई गई उसी से सरकार के मंशा पर सवाल खड़े होते हैं.

सहरसा में परीक्षा परिणाम से नाराज छात्रों ने भी मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका. राज्य में घोषित हुए इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम को लेकर जन—अधिकार पार्टी के छात्र परिषद के कार्यकर्ताओं ने राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी का पुतला दहन किया. इस मौके पर छात्र परिषद के अध्यक्ष गुड्डू यादव ने कहा कि परीक्षा परिणाम से साफ जाहिर है कि राज्य के स्कूल व कालेजों में पढ़ाई नहीं होती है.

विकास पुरूष कहलाने वाले सीएम ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लालकेश्वर, बच्चा राय, मेवालाल चौधरी के हाथों में गिरवी रख दिया है. राज्य की शिक्षा व्यवस्था की हालत दिनों दिन गिरती जा रही है. खराब परीक्षा परिणाम ने पूरे देश में बिहार के शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. कार्यकर्ताओ ने दुबारा कापियों के जांच की मांग की है. 

अभाविप कार्यकर्ताओं ने भी राज्य में गिरती शैक्षणिक व्यवस्था, भ्रष्टाचार व इंटरमीडिएट परीक्षा में धांधली का आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री का पुतला दहन किया. स्थानीय गंगजला चौक पर आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि आर्यभट्ट व वशिष्ठ नारायण सिंह जैसे महान गणितज्ञ को जन्म देने वाली धरती पर इंटरमीडिएट की परीक्षा में 70 प्रतिशत छात्र असफल हो जाते हैं.

वर्तमान राज्य सरकार ‘न पढ़ेगा बिहार, न बढ़ेगा बिहार’ की नीति पर चल रही है. जिसके कारण लगातार छह सालों से परीक्षा परिणाम में गिरावट हुआ है. पूरे देश में बिहार का परिणाम सबसे खराब रहा. जिससे राज्य के लाखों छात्रों को शर्मसार होना पड़ रहा है.

यह भी पढ़ें-  फेल छात्रों ने बोर्ड ऑफिस पर बोला हमला, पुलिस ने चटकाईं लाठियां