मुजफ्फरपुर महापापः ब्रजेश ठाकुर को हर साल 1 करोड़ देती थी सरकार, लड़कियों को बहुत पीटा जाता था

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्कः मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप केस में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, बड़े खुलासे हो रहे हैं. इस कांड में सबसे लेटेस्ट खुलासा यह हुआ है कि बिहार सरकार मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को हर साल एक करोड़ रुपए की रक़म देती थी. केवल बालिका गृह के लिए ठाकुर को हर साल 40 लाख रुपए मिलते थे. इसी बालिका गृह की 34 लड़कियों ने अपनी यातना की जो आपबीती बताई है उसे सुन ऐसा लगता है मानो ये 40 लाख रुपए उनके यौन शोषण को सुनिश्चित करने के लिए दिए जा रहे थे. ये खुलासा बीबीसी की एक रिपोर्ट में हुआ है.

एक एनजीओ को इतने टेंडर कैसे मिले ?

मुज़फ़्फरपुर में ठाकुर को वृद्धाश्रम, अल्पावास, खुला आश्रय और स्वाधार गृह के लिए भी टेंडर मिले हुए थे. खुला आश्रय के लिए हर साल 16 लाख, वृद्धाश्रम के लिए 15 लाख और अल्पावास के लिए 19 लाख रुपए मिलते थे. ठाकुर पर सरकारी महकमा इस कदर मेहरबान रहा है कि अब उसके पास किसी सवाल का जवाब नहीं है. किसी एक एनजीओ को एक साथ इतने टेंडर कैसे मिले.

इस सवाल का जवाब न बिहार का समाज कल्याण विभाग दे रहा है और न बाल संरक्षण विभाग. यही सवाल मुज़फ़्फ़रपुर की एसएसपी हरप्रीत कौर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ब्रजेश ठाकुर को टेंडर देने में कई नियमों का उल्लंघन किया गया है.

बच्चियों को पीटता और गालियां देता था ब्रजेश ठाकुर

पीड़ितों की मानें तो इस बालिका गृह में उनसे लगातार गंदा काम किया जाता रहा. एक पीड़िता ने मीडिया को बताया कि कैसे उसके और अन्य बच्चियों के साथ गंदा बर्ताव किया जाता था. पीड़िता ने आरोप लगाया है कि ब्रजेश ठाकुर बच्चियों के साथ ना केवल मारपीट करता था, बल्कि उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां भी देता था. हालांकि इतना कुछ झेलने के बाद भी इन बच्चियों का हौसला कम नहीं हुआ है.

शक का दायरा और बढ़ता जा रहा है- SSP

एसएसपी हरप्रीत कौर ने मीडिया को बताया कि एक-एक कर ऐसी चीज़ें सामने आ रही हैं जिनसे शक का दायरा और बढ़ता जा रहा है. जिस घर का चुनाव बालिका गृह के लिए किया गया था वो नियमों पर खरा नहीं उतरता है. जहां बालिका गृह था उसी कैंपस में ब्रजेश ठाकुर का घर है. उसी कैंपस से उनका अख़बार निकलता है. घर की स्थिति ठीक नहीं है. सीसीटीवी कैमरे का होना अनिवार्य है, लेकिन एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं था.

दरअसल पिछले दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर, छपरा, हाजीपुर के शेल्टर होम में 21 बच्चियों के साथ रेप की घटना सामने आई. यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया, जब टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की ऑडिट रिपोर्ट सामने आई. 31 मई को बिहार सरकार को सौंपी गई. इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कैसे इन बालिका गृह में छोटी-छोटी बच्चियों का शोषण किया जाता रहा है.

TISS की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक बच्चियों की मेडिकल जांच में उनके शरीर के कई हिस्सों पर जलने और कटने के निशान भी मिले हैं. ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक बच्चियों का रोज यौन शोषण होता था. मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, यौन शोषण से पहले बच्चियों को नशे की दवाइयां दी जाती थीं या फिर नशे का इंजेक्शन लगाया जाता था.