कोरोना से निपटने को लेकर सरकार क्या कर रही है, कोर्ट के सवाल का मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर कर पूरा ब्यौरा पेश किया

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बिहार में कोरोना की विस्फोटक स्थिति को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रूख अख्तियार कर लिया है. अब इसकी सुनवाई खुद चीफ जस्टिस की खंडपीठ कर रही है. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने सरकार की व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य सचिव से हलफनामा दायर करने को कहा था. इसके आलोक में आज बिहार के मुख्य सचिव ने राज्य में कोरोना महामारी से निपटने के लिए की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा कोर्ट में हलफनामा देकर पेश किया.

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की. सरकार द्वारा कोर्ट को बताया गया कि कोरोना की गंभीरता को देखते हुए राज्य को 300 मेट्रिक ऑक्सीजन की आवश्यकता है. कोर्ट ने यह जानना चाहा कि इसके लिए कितने टैंकर उपलब्ध हैं. साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वो पांच सदस्यीय टीम का गठन करे जो कोरोना मरीज के इलाज के साथ के लिए बनाई गई व्यवस्था पर भी निगरानी कर सके.

अधिवक्ता विनय कुमार पांडे ने कोर्ट को बताया कि पुलिस जो ऑक्सीजन सिलेंडर जब्त करती है उसे थाना में रखा जा रहा है. इसके लिए अभी तक कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं है. कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को अगली सुनवाई में जवाब देने का निर्देश दिया है. इस मामले पर अब अगली सुनवाई 10 मई को होगी.

बता दें कि बिहार में कोरोना की रफ्तार कम होने के बजाए दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से पिछले 24 घंटे की कोरोना रिपोर्ट जारी की गयी है. जिसमें 24 घंटे में पूरे बिहार में 13466 कोरोना के नये मरीज मिले हैं. इसके साथ ही बिहार का आंकड़ा 1,15066 पहुंच गया. सबसे अधिक मरीज राजधानी पटना में मिले हैं. 2410 कोरोना के नये मरीज मिले हैं.

बता दें कि कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने को लेकर सरकार ने पूरे बिहार में संपूर्ण लॉकडाउन किया है. 15 मई तक लॉकडाउन किया गया है. इसे सख्ती से लागू कराने को लेकर पुलिस बल के साथ सुरक्षा बल की अतिरिक्त पांच कंपनियां बिहार में लगायी गयी है. जो प्रत्येक जिले में कोरोना गाइडलाइन का पालन कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने का काम कर रही है.