नीतीश कुमार से क्यों बढ़ी थी दूरी, जीतनराम मांझी ने इतने दिनों बाद बतायी सच्चाई…

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री पद से किसने हटाया. नीतीश कुमार से उनकी दूरियां बढ़ने के पीछे का कारण क्या था. मांझी के नजरों में असली पलटूराम कौन है. चिराग और तेजस्वी में बेहतर कौन है. ऐसे तमाम सवालों का जवाब जीतनराम मांझी ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में बड़े ही बेबाक तरीके से दिया.

नीतीश कुमार के दूर जाने के पीछे के कारणों को जिक्र करते हुए जीतनराम मांझी ने कहा कि मैंने कभी भी पद की चिंता नहीं की है. लेकिन विधानसभा में मेरी उपस्थिति रहे इसकी चिंता जरूर रही है. इसी कारण से मैं लगातार अपने विधानसभा क्षेत्र के नेतृत्व करता रहा हूं. 2005 के नीतीश मंत्रिमंडल में जब हमपर दागी होने का आरोप लगाया गया तो मैंने तुरंत सीएम के इशारा मिलते ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया. यह मेरा पद की चाह नहीं रखने का सबसे बड़ा उदाहरण है.



वहीं नीतीश कुमार से दूर होने के पीछे के कारणों के बारे में बताते हुए मांझी ने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाल रहा था उसके कुछ ही दिनों के बाद कुछ ऐसी बाते आयी हम दोनों के बीच जिससे हमको लगा की नीतीश जी हमारे काम से खुश नहीं है. उन्हें लगने लगा कि मैं उऩके आशा और अपेक्षा पर खरा नहीं उतर रहा हूं. इन बातों को दूसरे से कहलवाया जाने लगा. जबकि ऐसी कोई भी बात नहीं थी. वो एक इशारा कर देते तो मैं एक मिनट सीएम पद पर नहीं रहता. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. उसी समय से हम दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगी.

जीतनराम मांझी ने लालू प्रसाद और उदय नारायण चौधरी को असली पलटूराम बताते हुए कहा कि मुझे सीएम पद से हटाने में सबसे बड़ी भूमिका लालू प्रसाद ने निभायी. वो मुझे हटाने के लिए राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक गए. मैं राबड़ी देवी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने लालू प्रसाद को ऐसा ना करने के लिए आग्रह किया था. लेकिन लालू जी ने मुझे सीएम पद से हटाने के लिए एड़ी चोटी की जोड़ लगा दी थी.

लालू प्रसाद अगर उस समय मेरा साथ देते तो मैं सीएम कुर्सी से नहीं हटता. समाजवाद का नारा देने वाले लालू प्रसाद कहा करते थे कि सुअर चराने वालों, चूहा खाने वालों पढ़ना लिखना सीखों, लेकिन जब उसी समाज का एक शख्स बिहार की बागडोर संभाला तो उनको बर्दाश्त नहीं हुआ. मेरे साथ वैसा व्यवहार हुआ जैसे एक गरीब का कपड़ा फटा रहता है तो एक तमाचा लगा देते है, लेकिन जब बड़े लोगों का कपड़ा फटा रहता है तो लोग मुंह घूमा लेते हैं.

मैंने अपने 9 महीने के कार्यकाल में कोई भी ऐसा काम नहीं किया जिससे राज्य और पार्टी की छवि खराब हुई हो. हां कुछ लोगों को मेरे काम से बुरा जरूर लगा. जिन्होंने इधर उधर करने का काम किया.

उधर तेजस्वी और चिराग में बेहतर कौन है क्या जवाब देते हुए मांझी ने कहा कि राजनीति संभवनाओं का खेल है. इसमें कौन बेहतर और कौन खराब की बातें नहीं होती. दोनों युवा है, दोनों में असीम संभवनाएं है. मैं उनके पिता के समान हूं मेरी हार्दिक दुआ दोनों के साथ है.