मिसाल : स्कूल में टीचर नहीं था, अब DM की साइंटिस्ट पत्नी फ्री में ले रहीं क्लास

लाइव सिटीज डेस्क : आईएएस बन कर देश की सेवा करना सबकी ख्वाहिश होती है. लेकिन प्रशासनिक कार्यों में अतिव्यस्तता शायद इतना अवसर नहीं देता कि समाज व भविष्य निर्माण में आईएएस अधिकारी अपना ज्यादा समय बिता सकें. लेकिन कुछ आईएएस ऐसे भी होते हैं जहां जाते हैं अपनी कार्यशैली और जनता की सेवा से सबके दिलों में ऐसी जगह बना लेते हैं, जिसे भुला पाना आसान नहीं होता है. studio11

एक ऐसे ही आईएएस अधिकारी है मंगेश घिल्डियाल जो वर्तमान में रुद्रप्रयाग के डीएम हैं. बता दें कि 2011 बैच के IAS अफसर मंगेश ने UPSC की परीक्षा में पूरे देश में चौथी रैंक हासिल की थी. उन्होंने अपनी व्यस्त समय से भी कुछ ऐसे बहुमूल्य समय निकाल कर ऐसा काम किया है जिससे उनकी हर जगह तारीफ़ हो रही है. 

दरअसल, रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल ने जिले में कार्यभार संभालते ही शिक्षा की बेहतरी के प्रयास शुरू कर दिए थे. मंगेश कुछ दिनों पहले एक रूटीन चेक के लिए रुद्रप्रयाग के राजकीय गर्ल्स इंटर कॉलेज गए थे. वहां जाने पर उन्हें मालूम हुआ कि स्कूल में साइंस का कोई टीचर ही नहीं है. इससे वे बच्चे के भविष्य को लेकर चिंतित हो उठे.

फिर उन्होंने तुरंत इसका समाधान निकाला और अपनी पत्नी ऊषा घिल्डियाल जो पेशे से साइंटिस्ट भी रह चुकी हैं  उनसे स्कूल में किसी शिक्षक की तैनाती होने तक पढ़ाने को कहा, पत्नी भी मान गईं और स्कूल की छात्राओं को उनकी साइंस की टीचर मिल गई. कॉलेज के प्रिंसिपल से जब इस बारे में बात की, तो उन्हें भी कोई आपत्ति नहीं थी और उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया.’ 

बता दें कि मंगेश की पत्नी ऊषा घिल्डियाल ने खुद पंतनगर यूनिवर्सिटी से प्लांट पैथलॉजी में पीएचडी किया है. इन दिनों वह विवि में नहीं हैं और खाली समय पर बच्चों के भविष्य को सवांरने में जुट गई हैं. डीएम की पत्नी उषा घिल्डियाल ने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में विज्ञान पढ़ाना शुरू कर दिया है. बिना किसी स्वार्थ और पैसे के निशुल्क रूप से उषा घिल्डियाल कक्षा 9 और 10वीं की छात्राओं को विज्ञान पढ़ा रही हैं. वह प्रतिदिन दो से ढाई घंटे स्कूल में बच्चों की पढ़ाई को दे रही हैं. सुबह साढ़े 8 बजे स्कूल पहुंच रही हैं, जबकि साढ़े 11 साढ़े बजे तक स्कूल में ही रहती हैं. 

इसके अलावा खुद डीएम मंगेश समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण कर रहे हैं. बच्चों की स्थिति जानने के लिए उनसे सवाल जबाव भी कर रहे हैं. वह बच्चों को पढ़ा भी रहे हैं. डीएम की पहाड़ के प्रति पीड़ा को देखते हुए उनकी पत्नी भी उनका साथ दे रही हैं. पहाड़ से पलायन रुके और यहां के छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए वह पूरा प्रयास कर रहे हैं. डीएम और उनकी पत्नी की इस पहल की रुद्रप्रयाग सहित अन्य स्थानों पर भी खूब सराहना हो रही है.

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