बड़ी दुर्गा स्थान में वैष्णव पद्धति से होती है मां की पूजा, यहां मां के दर्शन के बगैर पूजा को पूर्ण नहीं मानते हैं लोग

समस्तीपुर /रोसड़ा (राजू गुप्ता) : शहर के बड़ी दुर्गा स्थान चौक पर स्थापित बड़ी मैया का पूरे अनुमंडल क्षेत्र में सबसे अहम् स्थान प्राप्त है. मैया की प्रसिद्धि व महानता इतनी ज्यादा है कि यहां के दर्शन के बगैर क्षेत्र के लोगों की दुर्गा पूजा अधूरी मानी जाती है. बड़ी मैया की महिमा अपरंपार है. रोसड़ा क्षेत्र के लोगों के लिए इस स्थान की महत्ता काफी ज्यादा है.

दरभंगा महाराज के द्वारा रोसड़ा में स्थापित यह स्थान इस क्षेत्र में माता की सबसे पुरानी मंदिर है जिसे लोग पुरानी दुर्गा मंदिर के नाम से भी जानते है. इस मंदिर में आज भी वैष्णव पद्धति से ही माता की पूजा-अर्चना की जाती है. चैती दुर्गा हो या आश्विन मास में आयोजित दुर्गा पूजा लोगों की क जैसी भीड़ उमड़ती है. सामान्य दिनों में भी यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. पूरे रोसड़ा अनुमंडल क्षेत्र के अलावा आस-पास के इलाकों से भी यहां हजारों लोग आते हैं और पूजा-अर्चना कर अपनी मन्नतें मांगते है.


जिस दिन से मां का पट खुलता है उस दिन से ही रोसड़ा की सड़कों पर उमड़ी तमाम भीड़ भीड़ बड़ी मैया की ओर ही जाती दिखाई पड़ती है. इस स्थान पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ को नियंत्रण करने के लिए कार्यकर्ताओं की सूची बनायी जाती है. सभी पूरी मुस्तैदी से व्यवस्था संभालते हैंं जिससे कोई अव्यवस्था नहीं हो पाती है.

कार्यकर्ता अगर थोड़ी—सी भी लापरवाही करेंगे तो श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालना मुश्किल हो जायेगा. भीड़ कंट्रोल करने के लिए कार्यकर्ताओं की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि सभी को पहचान—पत्र जारी करना पड़ता है. खोइंचा भरने के लिए तो महिला श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ उमड़ पड़ती है कि इसके नियंत्रण करने में पुलिस भी हांफती रहती है. इस क्षेत्र में मान्यता है कि जोे भक्त बड़ी मैया के मंदिर में जाकर मां की पूजा अराधना नहीं करेंगे उनकी दुर्गा पूजा अधूरी रह जाती है.