जमुई : गिद्धौर हाई स्कूल के शौचालयों में लटका है ताला, छात्राओं को हो रही है असुविधा 

स्कूल के शौचालयों में लटकते ताला

जमुई/ गिद्धौर (राजेश कुमार) : केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जहां एक तरफ साफ़-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कई जगहों पर सरकार के दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. बतौर उदाहरण यह वाक़या है जमुई जिला के गिद्धौर स्थित महाराज चंद्रचूड़ विद्या मंदिर स्कूल का है, जहां स्वच्छता अभियान महज बैनर-पोस्टरों में सिमट कर रह गया है. आलम यह है कि विभागीय उदासीनता एवं विद्यालय प्रबंधन द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने की वजह से इस विद्यालय के शौचालयों में ताला लटका रहता है.

बंद पड़ा छात्राओं का शौचालय

ऐसे में विद्यार्थियों को शौच एवं लघुशंका के लिए बाहर खुले में अथवा झाड़ियों में जाना पड़ता है. बहुप्रतिष्ठित हस्तियों को ज्ञान प्रदान कर चुके करीब 8 दशक पुराने इस विद्यालय का गौरवशाली इतिहास रहा है. वर्तमान समय में यहां डेढ़ हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. 2 दर्जन से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं वाले इस विद्यालय में वर्ग नवम से इंटर तक की पढ़ाई होती है. प्राप्त जानकारी अनुसार सभी संकायों को मिलाकर 10 शिक्षिकाएं हैं.



शिकायती छात्राओं की गुहार

कक्षा नवम एवं दशम के भवन में 5 एवं इंटरस्तरीय भवन में भी 5 शौचालय बने हुए हैं. लेकिन अक्सर ही इनमें ताला लगा होता है. विभागीय पदाधिकारियों के आगमन की पूर्व सूचना पर इन शौचालयों को खोल दिया जाता है, जिस वजह से किसी का भी इसपर विशेष ध्यान नहीं जाता है. छात्राओं एवं शिक्षिकाओं की मानें तो उन्हें सर्वाधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. महाराज चंद्रचूड़ विद्या मंदिर में पढ़ रही कुछ लड़कियों ने बताया कि शौचालय में ताला लगे होने की वजह से लड़कियां नियमित विद्यालय आने से भी कतराती हैं.

इसके अलावा विद्यालय में सफाईकर्मी की भी नियुक्ति नहीं की गई है. जिस वजह से पूरे विद्यालय परिसर में गंदगी का अंबार लगा रहता है. कक्षाओं को नियमित साफ—सफाई नहीं होने की वजह से बेंच-डेस्क, फर्श और दीवार धूल-धूसरित रहते हैं. साथ ही आपको विद्यालय परिसर में यत्र-तत्र कागजों के टुकड़े बिखरे मिल जायेंगे. बताया गया कि यहां की सफाई भी एकमात्र आदेशपाल के ही जिम्मे है. लेकिन आदेशपाल भी इसकी सफाई नहीं करना चाहता है.

बच्चों ने बताया कि साफ़-सफाई करने में आदेशपाल को हीन भावना महसूस होती है. इसके अलावा विद्यालय में इतने अधिक विद्यार्थियों की संख्या एवं अन्य कार्यभार में व्यस्तता की वजह से प्रबंधन द्वारा भी सफाई के लिए कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है.