राष्ट्रपति भवन : देश की सबसे बड़ी इमारत, किसान के बेटे से लेकर वैज्ञानिक तक रहें इसके मुखिया

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नई दिल्ली: देश के 14वें राष्ट्रपति की तलाश पूरी हो गई और इसी के साथ राष्ट्रपति भवन को एक नया स्वामी भी मिल गया. रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में अब राष्ट्रपति भवन के नये मालिक होंगे. भारत का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है. भारतीय संविधान में यह बहुत गरिमा वाला पद है. और इसी के साथ ही राष्ट्रपति भवन का भी अपना अलग ही महत्व है. भारत की आजादी से 18 साल पहले बने इस भवन के बारे में कई ऐसी खास बातें हैं जो हर देशवासी को जरुर जाननी चाहिए. आज हम आपको राष्ट्रपति भवन से जुड़े ऐसे ही कुछ फैक्ट्स के बार में बता रहे हैं जिन्हें आप शायद ही जानते होंगे.

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‘वायसराय हाउस’ से ‘राष्ट्रपति भवन’

यह अदभुत एवं विशाल भवन ‘रायसीना पहाड़ी’ पर स्थित है. यह दुनिया की विशालतम इमारतों में से एक है. राष्ट्रपति भवन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है. इस भवन के निर्माण की सोच सर्वप्रथम 1911 में उस समय उत्पन्न हुई जब दिल्ली दरबार ने निर्णय किया कि भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानान्तरित की जाएगी.

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इसी के साथ में यह भी निर्णय लिया गया कि नई दिल्ली में ब्रिटिश वायसराय के रहने के लिए एक आलीशान भवन का निर्माण किया जाएगा. और तब अस्तित्व में आया राष्ट्रपति  भवन. सन 1950 तक इसे ‘वायसराय हाउस’ ही कहते थे. 26 जनवरी, 1950 को जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने और उन्होंने इस भवन में निवास करना शुरू किया, उसी दिन से इस भवन का नाम बदलकर राष्ट्रपति भवन कर दिया गया.

चार मंजिल वाले राष्ट्रपति भवन में 340 कमरे

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राष्ट्रपति का निवास स्थान खुद में ही काफी भव्य है. चार मंजिल वाले इस भवन में कुल 340 कमरे हैं, जिसे बनने में डेढ़ दशक से अधिक का समय लगा था.

1.4 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ यह भवन

आपको बता दें कि इस भवन के निर्माण के लिए 4,00,000 पाउंड का बजट मंजूर किया गया था लेकिन बनते-बनते लागत बढ़कर 8,77,136 पाउंड यानी उस समय के करीब 12.8 मिलियन रुपए तक पहुंच गई. इस इमारत के साथ-साथ मुगल गार्डन और कर्मचारियों के रहने के लिए आवास का भी निर्माण किया गया. जिससे यह लागत करीब 14 मिलियन यानी 1.4 करोड़ रुपए तक पहुंच गया.

17 साल का समय लगा तैयार होने में

आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि राष्ट्रपति भवन को 4 सालों में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन इस इमारत के बनने में 17 साल का लम्बा समय लग गया. खास बात यह है कि 18वें साल देश आजाद हो गया.

70 करोड़ ईंट से बनी ये इमारत

तकरीबन 2 लाख वर्गफीट में बने इस भवन में 700 मिलियन यानी 70 करोड़ ईंट और तीन मिलियन यानी 30 लाख क्यूबिक फीट पत्थर का प्रयोग किया गया था. विशालता और भव्यता के लिहाज से, दुनिया के कुछ ही राष्ट्राध्यक्षों के राष्ट्रपति भवन इसकी बराबरी कर पाएंगे.

ह्यूज कीलिंग थे इस भवन के चीफ इंजीनियर

राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट के मुताबिक इस भवन के वास्तुकार एड्विन लैंडसियर लूट्यन्स जबकि चीफ इंजीनियर ह्यूज कीलिंग थे. इसके अलावा कई भारतीय ठेकेदारों ने इस इमारत को बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है.

लुटियंस दिल्ली  की सबसे शानदार इमारत की बात ही कुछ और है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के विस्तार की यह इमारत गवाह रही है. इसमें किसान के बेटे से लेकर, वैज्ञानिक और साधारण परिवार से आए लोग इसके मुखिया रह चुके हैं. राष्ट्रपति भवन परिसर में संग्रहालय, उद्यान, समारोह कक्ष, कर्मचारियों और अंगरक्षकों के लिए अलग से जगह भी निर्धारित है.

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