अस्पतालों में 90 फीसदी पहुंचेगा ऑक्सीजन का खेप, औद्योगिक क्षेत्र के लिए 10 फीसदी का निर्धारण

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: प्रदेश में तेजी के साथ पांव पसार रहे कोरोना महामारी और हाल के कुछ दिनों से अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी की समस्या पर जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है. डीएम ने अपने मातहतों के साथ आयोजित बैठक में निर्देश दिया है कि अस्पतालों को ऑक्सीजन सिलेंडर प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा. जबकि उद्योग घरानों को अभी तक दिए जाने वाले ऑक्सीजन में कटौती की जाएगी.

डीएम ने कहा है कि राजधानी के अस्पतालों को उपलब्ध ऑक्सीजन का 90 फीसदी उपलब्ध कराया जाएगा. जबिक औद्योगिक क्षेत्रों में सिर्फ 10 फीसदी ही ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित किया जाय. अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर की आवश्यकता पूरी करने के लिए डॉ चंद्रशेखर सिंह ने आपूर्तिकर्ता एवं अस्पताल प्रतिनिधि के साथ बैठक की. अधिकारियों ने बताया कि पटना में तीन आपूर्तिकर्ता हैं जिनके द्वारा ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई अस्पतालों में की जा रही है. इनमें मैसर्स उषा एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड बाईपास रोड सिपारा, पाटलिपुत्रा इंडस्ट्रियल गैसेस प्राइवेट लिमिटेड सबलपुर दीदारगंज तथा बंशी एयर गैस प्राइवेट लिमिटेड फतुहा का नाम शामिल है.

डीएम ने प्रत्येक एजेंसी में एक एक दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति करने का निर्देश दिया. इसके लिए एजेंसी से संबद्ध अस्पताल, एजेंसी की क्षमता, एजेंसी द्वारा आपूर्ति के बारे में प्रतिदिन नजर रखने की बात कही. जिलाधिकारी ने अस्पतालों में आवश्यकता के अनुरूप ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए एक सेल गठन करने का निर्देश दिया. जिसमें महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, औषधि निरीक्षक एवं बियाडा के एक अधिकारी को शामिल करने को कहा. कहा कि कोई भी अस्पताल प्रतिदिन की आवश्यकता के अनुरूप ही सिलेंडर प्राप्त करेंगे. इसका अवैध भंडारण नहीं करेंगे ताकि सभी अस्पतालों में मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप सिलेंडर उपलब्ध कराया जा सके. जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारियों को सिलेंडर के अवैध भंडारण की जांच के लिए कहा.

दूसरे राज्यों में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मच गया है. बिहार राज्य में भी कहीं_कहीं यह समस्या देखने को मिल रही थी. जिसकी सूचना के बाद डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह ने आनन_फानन में बैठक बुलाया और इस बैठक में निर्देश जारी किया कि राजधानी के अस्पतालों को 90 फीसदी ऑक्सीजन आपूर्ति किया जाय. बाकी के 10 परसेंट से ही अब औद्योगिक घरानों को काम चलाना होगा.