यही था वह शुभ मुहूर्त जब लालू परिवार ने करवाया था रुद्राभिषेक, बदलने लगे हैं बयानों के सुर…!

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लाइव सिटीज डेस्क :  राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके परिवार ने बीते सोमवार को 10, सर्कुलर रोड स्थित अपने घर पर रुद्राभिषेक करवाया था. इसके बाद मंगलवार को लालू प्रसाद के बड़े बेटे और स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप ने अपने 3, देशरत्न मार्ग स्थित घर पर 24 घंटे चलने वाला अष्टयाम कीर्तन शुरू करवा दिया है. चारा घोटाले और अब कथि​त बेनामी संपत्ति के आरोप लगने के बाद सीबीआई, आईटी और ईडी ने लालू परिवार को रडार पर ले रखा है. इसलिए पूरा लालू परिवार अ​ब भगवान की शरण में है.


चटखारे लेकर हो रही है चर्चा

इस पूरी कवायद की चर्चा राजनीतिक हलकों में चटखारे लेकर हो रही है. कुछ लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले पर इतने बयान दिए जा चुके हैं कि अब कुछ कहने का ज्यादा नहीं बचा है. तो लोगों ने इसी को मुद्दा बना लिया है. लेकिन कोई कुछ भी कहे, पूजा—पाठ के बाद न सिर्फ बयानबाजी थम गई है बल्कि डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के इस्तीफे की मांग भी नेपथ्य में चली गई है.

अष्टयाम कीर्तन की शरण में तेजप्रताप

लालू प्रसाद के ​पारिवारिक पुरोहित ने उन्हें पहले रुद्राभिषेक और अब अष्टयाम कीर्तन की सलाह दी है. उनका मानना है कि इससे लालू परिवार के गर्दिश में गए सितारे फिर से जगमगा उठेंगे. मान्यता है कि इस कीर्तन से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं. मंगलवार की सुबह 4 बजे से शुरू हुए कीर्तन में श्रद्धालु को हरे राम, हरे कृष्ण का जाप करना होता है. साथ में हारमोनियम, ढोलक और झाल भी बजाया जाता है. इस कीर्तन के लिए कीर्तन मण्डल खासतौर पर रोहतास और बक्सर से बुलाई गई है. बुधवार को उनके घर पर भंडारे का आयोजन भी किया गया है.


क्या अंकों के फेर में हैं तेजस्वी यादव

कुछ लोग इस पूजा में गृह नक्षत्र तो कुछ अंकों का गणित भी तलाश रहे हैं. कुछ लोग इसे ‘8’ नंबर को साधने की कवायद मान रहे हैं. अंक ज्योतिष के मुताबिक 8 का अंक शनि का है. डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की कुण्डली में शनि का अंक खराब है इसीलिए वह जब भी रुद्राभिषेक करवाते हैं. 8 का ख्याल जरूर रखते हैं. तेजस्वी यादव ने ठीक एक माह पहले हाजीपुर के हरिहरनाथ मन्दिर में रुद्राभिषेक करवाया था. दिन था 17 जून. यानी 7 और 1 आठ. इसके ठीक एक माह बाद उन्होंने पटना में रुद्राभिषेक करवाया. तारीख थी 17 जुलाई, यानी फिर 7+1= 8. अब यह योग है या फिर संयोग, इसे तो तेजस्वी यादव ही बेहतर तरीके से बता सकते हैं.

पुराने शिव भक्त हैं लालू प्रसाद

जानकार बताते हैं कि लालू प्रसाद का परिवार भगवान शिव की उपासना काफी पहले से करता रहा है. जब—जब लालू प्रसाद संकट में घिरते रहे हैं, वह भगवान शिव की शरण में जाते रहे हैं. सोमवार को राजद सुप्रीमो ने रुद्राभिषेक करवाया था. ज्योतिष के विद्वान मानते हैं कि सावन के दूसरे सोमवार का चयन रुद्राभिषेक के लिए यूं ही नहीं किया गया था. इसके पीछे पूरी ज्योतिषीय गणना और विचार भी काम कर रहा था.


‘शिववास’ देखकर करवाया रुद्राभिषेक

दरअसल ज्योति​षी मानते हैं कि हर तिथि को रुद्राभिषेक नहीं करवाया जा सकता. इसके पीछे ‘शिववास’ देखने का विधान है. भगवान शिव कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में अलग—अलग स्थानों और आसनों पर विराजमान होते हैं. उनकी स्थिति के अनुसार रुद्राभिषेक करने का हर तिथि को अलग फल होता है. लालू प्रसाद के परिवार ने सोमवार दिनांक 16 जुलाई को रुद्राभिषेक करवाया था. उस दिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी थी. ज्योतिषीय गणना के अनुसार उस दिन भगवान शिव का वास ‘गौरी समीप’ था. जिसका फल अदभुत सुख कहा गया है. सुबह 11.28 मिनट से लेकर दोपहर 12.22 मिनट तक ‘सवार्थसिद्धि’ योग भी था. इसी शक्तिशाली मुहुर्त को लालू परिवार ने रुद्राभिषेक ​के लिए चुना था.

क्या वाकई सब कुछ ‘नॉर्मल’ है…?

इससे पहले खबर आई थी कि लालू प्रसाद के बड़े बेटे और बिहार सरकार के मंत्री तेजप्रताप ने भी इससे पहले काशी में जाकर हवन—पूजन करवाया था. चर्चा उठी थी कि तेजप्रताप यादव ने शत्रु विनाशक जाप का आयोजन किया है. लेकिन वह जाप उनकी स्थिति को सुधार पाने में नाकाम रहा था. लेकिन चर्चा है कि लालू परिवार के रुद्राभिषेक का नतीजा दिखने लगा है. मंगलवार की शाम सीएम नीतीश ने कैबिनेट की बैठक बुलाई थी. बैठक के बाद तेजस्वी और तेजप्रताप दोनों नीतीश कुमार के कमरे में उनसे मिलने गए थे. मिलने के बाद खबर आई कि अब सब ठीक है. नीतीश से मुलाकात सकारात्मक रहने के बाद लालू परिवार में खुशियों का रिचार्ज तो हो चुका है, लेकिन इस रिचार्ज की वैलेडिटी कितनी होगी, इसका फैसला वक्त करेगा.

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